सोनबेहट का पुल और टेंगेरा माछ

कार्तिक का महीना था | मैं और मेरे बड़े भाई सम्भु ने सुना की सोनबेहट, जो हमारे गाँव से 1 कोष दूर था वंहा एक खव्वी है जिसमे बहुत सारा माछ होने का खबर मिला हमें | भैया बोले चलो हम वंहा जाते हैं | मैंने सुना की वह जगह जहाँ हम जा रहे हैं वह नदी के बीच में स्थित एक गढ़ा है और कुछ नहीं | यह जानकार मैं बहुत ज्यादा खुश नहीं था| वंहा पहुँचने पर जो मैंने देखा उससे तो मुझे पूरा विश्वास हो गया की हमारा वंहा जाना बेकार जाने वाला है क्योंकि उस छोटे से गड्ढ़े में सिर्फ चार पांच भैंसे थे और मछली का कोई बोल चाल न था | मैंने फिर भैया से पूछा की क्या हमें यंहा कोशिश करना चाहिए या फिर जाना चाहिए | वो बोले की उनको मालूम है की वंहा माछ होगा, सो बस मैं उनकी बात मान ली और फिर हम दोनों पानी में उतर गए |

वंहा केबल दोन्ही फेकने से कुछ भी हांसिल होने वाला नहीं था क्योंकि गड्ढ़े में बहुत सारा कीचड़ था| पहली पार डालने के बाद हर दूसरा मल्लाह यही सोचेगा की वंहा मछली नहीं है और इसलिए वंहा जाल डालना बेकार है| पर मेरे भैया उनके पिछले साल के अनुभव से जानते थे की वंहा मछली है | उन्होंने कहा की अगर हम दोन्ही को फेकने के बाद हाथ से जाल को समटना शुरू करे तो मछली पकड़ा जा सकता है | हमने वैसा ही किया | जाल पानी में डालने के बाद हाथ से जाल को समेटना शुरू कर दिया | तब जाकर मुझे मालूम हुवा की मछली कहा छिपी हुई थी | भैंसों के चलने से बनी गड्ढों में एक साथ दस- बारह टेंगेरा और सिंघी-मांगुर तथा गोराई छुपे हुए थे | यह बात जब मुझे मालूम हुवा तो मैं दंग रह गया की किस तरह कभी कभी लोगो का पर्यावरण का ज्ञान लाभदायक होता है |

कुछ ही देर में हमने करीब सात -आठ किलो माछ पकड़ लिए | मैं तो मेरे दोनों हाथों में मछलियाँ भर भर के बाहर रखा रहा था | यह देख मेरे भैया भी अचरज में थे की गाँव से इतने सालों दूर रहने के बाबजूद मैं की तरह इतनी सारी मछली पकड़ पा रहा हूँ | फिर उन्होंने कहा की हमे अब चलना चाहिए क्योंकि अगर एक ही दिन में बहुत सारी मछाली पकड़ लेंगे तो लोगो को मालूम हो जायेगा और वो फिर सब ख़त्म कर देंगे | सो उस दिन हमने मछली मरना वही शेष कर दिया और फिर उसके बाद कई दिनों तक वंहा जाते रहे | हमने उन पांच दिनों में कम से कम एक आधा मन[1] मछली पकड़ा होगा | इतनी सारी मछलियाँ मैंने आज तक एक साथ कभी नहीं पकड़ा था |

[1] मन स्थानीय भासा में ४० किलो को कहते हैं

Tengera (Mystus sp.)
)

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Crazy about fishing

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