Resonating Words
Sep 6, 2018 · 2 min read

हे कृष्णा कब आओगे.........

हे कृष्णा तुम कब आओगे
फिर आकर धरती पर
कब न्याय चक्र चलाओगे
हे कृष्णा कब आओगे

नित होते चीर हरण से
बेजार हुईं सैरंध्री है
किस किस की लाज बचाओगे
एक नहीं जाने कितनी हैं
इतना चीर कहाँ पाओगे
कुछ हैं तरुणी कुछ प्रौढ़ा भी
कुछ तो नन्ही तितली हैं
कामांधों से भरी सभा है
कब रणकौशल दिखलाओगे
हे कृष्णा कब आओगे
चहुं दिस नजर घुमा जो देखा
व्यभिचारी, कुत्सित मन पाया
हर कदम दुःशासन हैं मिलते
रक्षक मर्यादा का एक न पाया
ले हाथों में चक्र सुदर्शन
कब उनके कर्मों का फल
उनको तुम दे पाओगे
हे कृष्णा कब आओगे.......

जाति धर्म में बंटा हुआ
इंसां अब हैवान हुआ
हर रिश्तों पर स्वार्थ है हावी
बस मतलब की है यारी
वक्त पड़े तो गले मिला
वर्ना भाई भी अंजान हुआ
अब तो ऐसा है आलम कि
जो था माली उस बगिया का
सींचा जिसको बड़े जतन से
वह उसमें ही मेहमान हुआ
बोली पहली सीखी जिनसे
लगे सिखाने उन्हें दुनियादारी
उनको ही चुप रहने कहते
वह बाबुल अब बेजुबान हुआ
फिर नतमस्तक होंगी औलादें
वह युग वापस कब लाओगे
हे कृष्णा कब आओगे........

अंधेर मची जग में है सारी
दूजे से बढ़ने की होड़ में
मानवता बस बनी मुखौटा
हर कदम छल-प्रपंच और है धोखा
रक्तरंजित होती है न्याय नित
बिकते फैसले अब न्यायालों में
हो रही नीलाम कटघरों में नित
अब तो विश्वसनीयता गीता की
फर्जी मुकदमों में कितने मासूम
जा पहुँचे है जेल ,तहखानों में
वहीं दरिंदे हो जाते बाइज्जत बरी
अभाव में ठोस सबूतों के
झूठ से सच है अब हर पल हारी
ईमान धरम से चलने वालों का
इस जग में है अब रहना भारी
सत्य पर विश्वास अब तभी जमेगा
जब कोई चमत्कार दिखाओगे
हे कृष्णा कब आओगे............

-रश्मि