रिफ्लेक्शन्स

rupesh kashyap
Sep 9, 2018 · 4 min read

आज बारिश नहीं हो रही थी। मगर मन में बौछारें रुकने का नाम नहीं ले रही थीं। एक लंबा अरसा हुआ था उसे लंबी ड्राइविंग पर गए। इंसान का वहम है कि रास्ते थम जाते हैं। इसलिए आज वो भी थमना नहीं चाहती थी।

आसमान में बादल कजरारे हो रखे थे। रोमांस हवाओं में था मगर उसके मन में...पता नहीं। अब मन का क्या…रास्ता तो सीधा है, मोड़ तो सारा मन का है न। आसमान में चौदहवीं का चांद हो या हवाओं में रोमांस, जबतक मन में कुछ न हो तो बाकी सब भ्रम होता है। दूसरे ही पल उसने फ़ोन से उसका सबसे पंसदीदा गाना डिसकनेक्ट कर दिया जो कार की म्यूज़िक सिस्टम से कनेक्टेड था। रेडियो भी बंद कर दिया। जो सबकुछ कनेक्टेड था वो उसी को तो डी-कंस्ट्रक्ट करना चाहती थी।

वो कार के विंडो ग्लास को कभी ऊपर करती तो कभी नीचे। ये सिलसिला तक़रीबन 5 से 7 मिनट चला होगा। जो बादल हवाओं से मिल गए थे उन्होंने, कार की विंडशील्ड को अपना स्लाइडर बना लिया था। ऐसे फ़िसल रहे थे जैसे पार्क में बच्चे स्लाइडर पर पहले उल्टा चढ़ते हैं फिर फ़िसलते हैं। फिर उसे लगा कि हवाएं इतना शोर क्यों करती हैं। ये ऐसा सवाल था कि हवा अगर ज़हनी तौर पर कार में मौजूद होती तो बुरा मान जाती। अरे, सीधा आरोप था। उस सवाल में डिनायल था ख़ुद से। उसने संभाला और दूसरे ही मिनट उसे लगा हवाएं तो बस बह रही हैं जो उसका काम है जैसे कार का काम है चलना। तो वो चल रही है। तो खिड़की खोलने से ये शोर कैसा? फिर उसे हंसी आ गई। जब सच सेकंड के नीनानवे हिस्से में खुलता है तो हंसी आ ही जाती है। मतलब इतना साइंस तो पढ़ ही चुकी थी। मगर साइंस पढ़ना एक चीज़ है और कार की खिड़की बंद कर ज़िन्दगी जीना दूसरी।

इधर हवा थी कि बहने का काम कर रही थी। कार चलने का काम कर रही थी। दोनों अपना अपना काम कर तो रहे थे मगर एक दूसरे के विपरीत। इसलिए शोर था। हम भी यूँ ही अपना अपना काम जब एक दूसरे के विपरीत करते हैं तो शोर होता है। और वो हंसे जा रही थी। पागल जैसी। फिर उसे लगा उसे पागल जैसे क्यों हंसना चाहिये। आख़िर पागल लोग कैसे हंसते हैं? क्या वो किसी स्टैंड अप कमीडियन के जोक पर नहीं हंसते? या किसी फ़ॉर्वर्डेड व्हाट्सएप्प जोक पर उन्हें ROFLया LOL करना नहीं आता ? तो क्यों हंसते हैं पागल लोग? क्या वो भी एक पागल है? फिर वो हंसने लगी। कार एक सिग्नल पर रुकी थी। दूसरी कार में सवार एक बच्चा उसकी ओर देखकर मुस्कुरा रहा था और उसकी मम्मी हैरान थी उसे हंसते देखकर। बच्चों और बड़ों में यूँ ही फ़र्क नहीं होता।

पागल। हंसी। बच्चा। औरत। हैरानगी। इस तरह के क्विंटएसेंशियल सवाल करते करते और जब वो कई सिग्नल पीछे छोड़ आई, एक्चुअली, कुछेक तोड़ भी आई तो अचानक उसकी नज़र सामने एक बड़ी सी दीवार पर बने एक बड़े से फ्लेमिंगो की पेंटिंग पर पड़ी। उसने कार उधर ही मोड़ दिया। उसे लगा कि अगर उसने फ्लेमिंगो को अभी नहीं देखा तो वो उड़ जाएगा। और उड़ जाना किसी भी भाषा में एक सशक्त क्रिया है। फिर वैसे ही सवाल जिसे पूछकर वो कुछ देर पागलों जैसी हंसी थी।

वो फ्लेमिंगो को देख रही थी। एकटक। जो ऐसा लग रहा था वो दीवार छोड़कर उड़ जाएगा। और सवाल उसे देख रहे थे। एकटक।

हम क्यों उड़ना चाहते हैं? क्या हम सचमुच उड़ पाते हैं? हमें क्यों लगता है कि हम उड़ने के लिए बने हैं? राइट बंधुओं को भी ऐसा ही लगा होगा न। हमें ऐसा क्यों लगता है कि जबतक हम उड़ेंगे नहीं तबतक हमारा जीना सार्थक नहीं होगा। उड़ना है तो किस वजह से? सिर्फ़ इस वजह से कि जहां हम हैं वहां एक बंधन है? दीवार है? हम रिश्तों से, काम से, अपनी जिम्मेदारियों से, अपनी नाकामियों से, अपने डर से या जैसा हम चाहते हैं, वैसा न होने की वजह से उड़ना चाहते हैं? कहीं उड़ना भागना तो नहीं है? कहीं उड़ना पलायन तो नहीं है? कहीं किसी चीज़ की ज़ल्दी तो नहीं है? तो उड़ने की वजह ढूंढो। उड़ना कब ख़ूबसूरत है? कुछ पाने की चाहत से, कुछ कर दिखाने के जज़्बे से, कुछ बन जाने की नियत से? आख़िर किसके लिए? उड़ने की सही वजह क्या होनी चाहिये। या उड़ने की कोई वजह होनी भी चाहिए या नहीं?क्या यह संभव है कि आप हमेशा उड़ते रह सकें?

वो पागलों जैसे हंस रही थी। दस साल पहले वो भी तो एक फ्लेमिंगो जैसी ही थी। गुलाबी।

#रूपेशकश्यप

#शॉर्टस्टोरीज़ #impromtustories #उड़ान #लघुकथा #कहानी #इंट्रोस्पेक्सटिव

rupesh kashyap

Written by

Published a poetry book 'Alghoza' Lyricist, Script Writer, Ad film maker. Executive Creative Director@hotstar

Welcome to a place where words matter. On Medium, smart voices and original ideas take center stage - with no ads in sight. Watch
Follow all the topics you care about, and we’ll deliver the best stories for you to your homepage and inbox. Explore
Get unlimited access to the best stories on Medium — and support writers while you’re at it. Just $5/month. Upgrade