स्टार्टअप योजना

जैसा कि आप सभी ने हाल ही में समाचारों में देखा या सुना होगा कि सरकार के बहुप्रतीक्षित ‘स्टार्टअप इंडिया’ कार्यक्रम का ऐलान हो गया है। वर्ष2015 सितंबर महीने में जब प्रधानमंत्री मोदी जी अमेरिका दौरे पर गये थे तभी से इस कार्यक्रम की रूपरेखा उन्होंने तैयार करनी
प्रारंभ कर दी थी। अमेरिका में सिलिकन वैली में आज लाखों स्टार्टअप कंपनियाँ कार्य कर रही है और अनेक रोजगारों का सृजन कर रही हैं, इसी तर्ज पर मोदी जी ने वर्ष 2016 मे 16 जनवरी को भारत में भी एक नए कार्यक्रम ‘स्टार्ट अप इंडिया’ की शुरुआत की। इसके तहत उन्होंने एक 19 सूत्रीय ऐक्शन प्लान की घोषणा की जो स्टार्टअप कंपनियों की मदद करेगा।


स्टार्टअप कंपनी किसे कहते है

भारत सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड प्रमोशन (डीआईपीपी) के अनुसार-

‘‘स्टार्ट अप कंपनी वह कंपनी है जो भारत वर्ष में गत पांच वर्षों के अंदर रजिस्टर हुई है और जिसका टर्न ओवर 25 करोड़ से अधिक किसी भी वित्त वर्ष में अभी तक नहीं हुआ हो। यह कंपनी इनोवेशन, डेवलपमेंट, डिप्लॉयमेंट, नए प्रोडक्ट्स का कमर्षिलाइजेशन, टेक्नॉलॉजी ड्रिवन प्रोसेसेज या सर्विसेज, अथवा इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टीज की दिशा में कार्य कर रही हो, ऐसी अपेक्षा की जाती है। ’’

ये स्टार्टअप कंपनियाँ या तो प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के रूप में रजिस्टर हुई हों (कंपनीज ऐक्ट 2013 के तहत) अथवा ये एक रजिस्टर्ड पार्टनरशिप फर्म हों (इंडियन पार्टनरशिप ऐक्ट 1932 के तहत), अथवा एक लिमिटेड लाइबिलिटी पार्टनरशिप हों ( पार्टनरशिप एक्ट 2008 के तहत)।

आज ज्यादातर स्टार्ट अप कंपनियां तकनीक आधारित हैं जो आधुनिक तकनीक का प्रयोग कर रही हैं। उदाहरण के तौर पर OLA कैब जो चार साल पुरानी स्टार्टअप कंपनी है पर यह आज छोटे-बड़े शहरों में कैब की सुविधा प्रदान कर रही है और इसने अब तक करीब 200,000 ड्राइवरों को रोजगार दिया है। OLA कैब कंपनी ने सिर्फ तकनीक का चतुराई से इस्तेमाल किया है और इसी के बल पर यह आज इतनी आगे पहुँची है। इसी तरह अन्य उदाहरण है Amazon, Flipkart, Uber आदि जो एक स्टार्टअप कंपनी से शुरू होकर आज मिलियन डॉलर की कंपनी के रूप में स्थापित हो चुकी है।

आज हमारे देश में आइडिया और इनोवेशन की कोई कमी नहीं है। मौजूद समय में भारत दुनिया के टॉप पांच देशों की सूची में दूसरे नंबर पर है जहां करीब 9,500 से लेकर 10,500 स्टार्टअप कंपनियां मौजूद हैं और इस नए कैंपेन की घोषणा से सरकार आने वाले वर्षों र्में 30,000 स्टार्टअप्स बनाने का लक्ष्य तय कर रही है। यह संख्या इससे अधिक भी हो सकती है।


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रोजगार मांगने के बजाए रोजगार देने वाले युवा:

आज स्टार्टअप कंपनी का मुख्य आकर्षण युवाओं में है और वो सरकार की इस पहल से बहुत उत्साहित है। जो युवा बेरोजगार हैं उनमें भी कुछ कर दिखाने की नई चाह जागी है। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहा था कि आज यदि हमारे पास लाखों समस्याएं है तो करोड़ों/अरबों दिमाग भी तो है और ये सभी दिमाग इन लाखों समस्याओं का हल खोजने में सक्षम हैं । अर्थात आज के युवा के पास आइडिया और क्षमता दोनों हैं , बस उन्हें सरकार के समर्थन की आवष्यकता है, ताकि वो यह सुनिश्चित कर सकें कि उनके द्वारा सोचा आइडिया भी साक्षात रूप में परिवर्तित हो सकता है और आज का युवा भी रोजगार मांगने के बजाए रोज़गार का सृजनकर्ता बन सकता है।


उद्यमिता को बढ़ावा

सरकार की इस पहल से एक ओर जहां रोजगारों का सृजन होगा, वहीं उद्यमिता को भी बढ़ावा मिलेगा। आज यदि आप स्वयं का बिजनेस स्टार्ट करना चाहते हैं तो शायद निम्न बातें आपके लिए आवश्यक होंगी;

  • आपको अपने प्रोडक्ट की पूरी जानकारी होनी चाहिए और अन्य किसी भी व्यक्ति से अधिक आपको अपने प्रोडक् पर विश्वास होना चाहिए।
  • आप को अपने ग्राहकों के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए कि उन्हें क्या पसंद है या वो किस वर्ग के लोग है।
  • आपके अंदर इस कार्य को सफल बनाने की प्रबल इच्छा शक्ति एवं प्रचुर क्षमता होनी चाहिए।

उपरोक्त सभी के अलावा आपको धन, श्रम एवं स्थान की आव श्यकता भी पड़ती है। अंत में आपके अंदर जोखिम उठाने का हौसला भी होना चाहिए। युवा उद्यमियों को प्रधानमंत्री की तरफ से निमंत्रण मिला है कि वो सरकार के साथ मिलकर विकास की प्रक्रिया में भागीदार
बने और सूचना तकनीक के माध्यम से देश को अनंत ऊंचाईयों तक ले जाने में सहयोग दें। उद्यमिता की संस्कृति को युवाओं में प्रोत्साहित करने के लिए ही सरकार ने निम्न ऐक्शन प्लान घोषणा की है।


19 सूत्रीय ऐक्शन प्लान

सरकार के अनुसार निम्न कार्यक्रम एवं सुविधाओं का लाभ उठाने वाली कंपनियां वो होंगी जो भारत में गत पांच वर्षों के अंदर रजिस्टर हुई हों और जिनका टर्न ओवर 25 करोड़ रुपये से अधिक न हो। ऐसी कंपनियों को स्टार्टअप की श्रेणी में रखा जाएगा और ये कंपनियां ही निम्न सरकारी स्कीम के लिए योग्य मानी जाएंगी;

  • सेल्फ सर्टिफिकेशन या स्वप्रमाणन:तीन वर्षों तक स्टार्टअप कंपनियों को स्वयं को सेल्फ सर्टिफाई करने की स्वतंत्रता दी गई हैअर्थात इन्हें नौ पर्यावरण एवं श्रम कानूनों को मानने की बाध्यता नहीं होगी।
  • स्टार्टअप इंडिया हब: एक स्टार्ट अप इंडिया हब बनाने का प्रस्ताव है जहां पर स्टार्ट अप ईको सिस्टम के लिए सिंगल पॉइंट कॉन्टैक्ट एवं फंडिंग की सुविधा उपलब्ध हो। यहां लोग ज्ञान एवं विचारों का आदान प्रदान भी कर सकें।
  • मोबाइल ऐप की सुविधा: किसी भी स्टार्टअप कंपनी को रजिस्टर करने की स्वीकृति मिल जाएगी। यह कार्य ऑन लाइन फार्म के द्वारा होगा।
  • पेटेंट रजिस्ट्रेशन: स्टार्ट अप इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी प्रोटेक्शन स्कीम की शुरुआत की जा रही है ताकि नए पेटेंट ट्रेडमार्क और डिजाइनों की फाइलिंग आसानी से हो सके। पेटेंट रजिस्ट्रेशन फीस में भी 80 प्रतिशत तक की कमी की जा रही है।
  • सरकारी टेंडर: स्टार्टअप कंपनियों द्वारा सरकारी प्रोक्योरमेंट टेंडरों में भागीदारी के लिए सरल नियम बनाए जा रहे हैं।
  • असफलता की स्थिति: असफलता की स्थिति में तुरंत बाहर निकलने के लिए 90 दिनों के भीतर वाईंडअप करने की सुविधा।
  • फंडिग: स्टार्टअप कंपनियों को फंडिंग की सुविधा देने के लिए सरकार ने 2500 करोड़ रुपयों का एक कार्पस फंड प्रति वर्ष के लिए सेटअप किया है जो चार वर्षों तक जारी रहेगा अर्थात कुल मूल्य है ,10,000 करोड़ रुपये।
  • क्रेडिट गारंटी: स्टार्टअप कंपनियों के लिए एक क्रेडिट गारंटी फंड जिसमें 500 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष का कॉर्पस बजट जो चार वर्षों तक जारी रहेगा (कुल मूल्य 2000 करोड़ रुपये) ताकि नये प्रयोगों को प्रोत्साहन मिले ।
  • इन्सपेक्शन से छूट: सरकार की तरफ से स्टार्टअप कंपनियों में किसी तरह की दखलंदाजी नहीं की जाएगी। अतः नए स्टार्टअप्स के लिए तीन साल तक कोई सरकारी इन्सपेक्शन नहीं किया जाएगा। इससे समय व पैसा दोनों की बचत होगी।
  • इन्कमटैक्स में छूट: तीन वर्षों तक स्टार्टअप से होने वाले प्रॉफिट पर इन्कमटैक्स से छूट मिलेगी।
  • अन्य टैक्स में छूट: यदि इन्वेस्टर एक रजिस्टर्ड फर्म में कैपिटल गेन इन्वेस्ट करता है तो कैपिटल गेन टैक्स से छूट मिलेगी। यदि आप स्टार्टअप में बाजार मूल्य से अधिक का इन्वेस्टमेंट इन्क्यूबेटर्स के लिए करते हैं तो इस पर भी टैक्स से छूट मिलेगी।
  • कोलेबोरेशन: देश एवं विदेश में स्टार्टअप फेस्ट का आयोजन किया जाएगा ताकि आप को नई दिशा मिले और कोलेबोरेशन को बढ़ावा मिले।
  • पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप: देशभर में 70 इन्क्यूबेटर्स बनाने के लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप का सहारा लिया जाएगा।
  • स्टार्टअप सेंटर्स: देशभर में 31 स्टार्टअप सेंटर्स सेटअप किए जायेंगे।
  • रिसर्च पार्क: शिक्षण संस्थानों को उद्योगों से जोड़ने के लिए एवं रिसर्च और डेवलपमेंट प्रयासों को विकसित करने के लिए सात रिसर्च पार्कों को स्थापित करने की योजना। ये पार्क आईआईटी मद्रास में स्थापित रिसर्च पार्क के मॉडल पर आधारित होंगे।
  • बायोटेक्नॉलॉजी स्टार्टअप: 5 नये बायो क्लस्टर्स और 50 नए बायो इन्क्यूबेटर्स बनाने की योजना जो बायोटेक्नॉलॉजी के क्षेत्र में स्टार्टअप को बढ़ावा देंगे।
  • इनोवेशन अवार्ड: नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर डेवलपमेंट एंड हार्नेसिंग इनोवेशन के नाम से 10 लाख रुपये के इनाम की योजना जो 20 छात्रों को इनोवेशन को प्रोत्साहित करने के लिए दिया जाएगा।
  • इनोवेशन हब: अटल इनोवेशन मिशन और सेल्फ एम्प्लॉयमेंट एंड टेलेंट यूटिलाइजेशन योजनाओं के लांच से इनोवेन हब के लिए एक प्लेटफोर्म तैयार हुआ है।
  • इन्क्यूबेटर्स का चुनाव: दस इन्क्यूबेटर्स का चुनाव जो एक बड़ी चुनौती द्वारा होगा, जिन्हें प्रत्येक को दस करोड़ रुपये दिए जाएंगे ताकि वो स्टार्टअप कंपनियों को प्रोत्साहित करें एवं उनके सलाहकार बनें।
इन्क्यूबेटर्स किसे कहते है
इन्क्यूबेटर एक ऐसा स्थान होता है जो नए, छोटे
बिजनेस के लिए कम किराए पर सपोर्ट स्टाफ एवं
उपकरणों के साथ उपलब्ध कराया जाता है।
स्टार्टअप इन्क्यूबेटर
यह एक सहयोगी कार्यक्रम है जो नए स्टार्टअप को
सफल बनाने में मदद देने के लिए तैयार किया गया
है। इन्क्यूबेटर्स नए उद्यमियों को कार्य के लिए जगह,
फंडिंग, सलाह, प्रषिक्षण आदि प्रदान करते हैं, ताकि
नए उद्यमी अपने उद्यम को चलाने में आने वाली कुछ
प्रारंभिक परेषानियों को मिलकर दूर कर सकें।
स्टार्टअप इन्क्यूबेटर्स का मूल उद्देष्य है उद्यमियों को
अपना बिजनेस बढ़ाने में भरपूर मदद करना।

उपरोक्त सभी घोषणाओं से युवाओं में काफी जोश है और स्टार्टअप इंडिया इनीशियेटिव में
रोजगार पैदा करने की क्षमता का स्वागत इसलिए और भी बढ़ा है क्योंकि मौजूदा समय में
मैन्यूफैक्चरिंग सैक्टर में गिरावट का दौर है जिसका कारण है बढ़ता ऑटोमेषन अतः
स्टार्टअप सेक्टर लोगों को रोजगार मुहैया कराएगा।

जैसा कि पहले भी कहा जा चुका है आज भारत विश्व का तेजी से विकसित होने वाला
दूसरे या तीसरे नंबर का स्टार्टअप ईकोसिस्टम बनता जा रहा है। पिछले दशकों में
स्वरोजगार या स्टार्टअप के क्षेत्र में उभरे और कामयाब हुए उद्यमियों की संख्या देश में
अभी करीब 5000 है और एक सर्वे के मुताबिक इसमें से ज्यादातर कंपनियां तकनीकी क्षेत्र
में है तथा बंगलौर, मुंबई और दिल्ली एनसीआर तक ही सीमित है। लेकिन सरकार की इस
पहल से अन्य षहरों में भी स्टार्टअप कंपनियां बनेंगी और आने वाले 10 वर्षों में र्उम्मीद की
जा सकती है कि इसी सेक्टर में करीब 35 से 40 लाख रोजगार मार्केट में आ सकते हैं।

आज स्टार्टअप को केवल मोबाइल और लैपटॉप से जोड़कर ही देखा जाता है और इसे
इसी से संबंधित माना जाता है। अर्थात आमतौर पर स्टार्टअप एक ऐसी कंपनी मानी जाती
है जिसमें बहुत से लोग काम करते हैं और यह बिलियन डॉलर का कारोबार करती है।
लेकिन इसके ठी विपरीत यदि एक स्टार्टअप ऐसी कंपनी हो जहां केवल पांच लोग ही
कार्यरत हों, तो भी यह सरकार के विकास में भागीदार बन सकती है।

अंत में यही कहा जा सकता है कि युवा उद्यमियों के लिए सरकार के नीति निर्धारकों की
ओर से बढ़ावा मिलना ही बहुत बड़ी उपलब्धि है। युवा उद्यमियों को अपना बिजनेस चलाने
के लिए जिस प्रकार प्रारंभिक परशानियों का सामना करना पड़ता था जैसे कंपनी को
रजिस्टर करना, लाइसेंस प्राप्त करना आदि से अब निजात मिलने की संभावना है। सरकार
ने इस सेक्टर में जो रियायतें देने की घोषणा की है उससे यह सेक्टर निश्चित ही रफ्तार
पकडे़गा और उम्मीद की जा रही है कि इस सेक्टर में प्रतिवर्ष चार लाख रोजगारों का
सृजन हो सकता है अर्थात आने वाले वर्षों में आईटी सेक्टर के बाद यह सेक्टर सबसे
अधिक रोजगार उपलब्ध कराने वाला सेक्टर बन जायेगा।