राम राम जी 14.8.2016
आज जीवन के तजुर्बे का आंकलन करने बैठी तो अब तक जो भी व्यक्तिगत रूप से महसूस किया उसी विषय पर लिखने की कोशिश कर रही हूँ।

यह जरुरी नहीं कि जीवन में हमेशा प्रिय क्षण ही आएं एवं दूसरे लोगों का अनुकूल व्यवहार ही हमें प्राप्त हो। अपमान, शोक, वियोग, हानि, असफलता आदि तमाम स्थितियां आती रहती हैं और जाती भी रहती है। दुनिया का कोई भी इंसान ऐसी परिस्थितियों से बच नहीं सकता हैं इसलिए मौन और मुस्कुराहट को अपना आभूषण बनायें रखना पड़ता है। जीवन का चक्र ऐसे ही चलता रहेगा,रोयेगें तो भी जीवन तो जीना ही है, तो फिर क्यों ना हंसकर जिंदगी को सार्थक बनाया जाये, मुस्कुराकर हर क्षण को स्वीकार किया जाये।

ये हौसले भी किसी हकीम से कम नहीं होते है,हर तकलीफ को ताक़त बना देते है। उम्र के अब तक के अनुभव से आखिर यह समझ आ गया कि बेवजह ना दिल पे बोझ भारी रखना होगा ,ज़िंदगी एक खूबसूरत जंग है, इसे यूहीं जारी रखना होगा। 
किसी के कहने से यदि अच्छा या बुरा होने लगे तो ये संसार या तो स्वर्ग बन जायेगा या पूरी तरह से नर्क में बदल जाएगा। दिमाग हरपल यही सलाह देते रहता है कि, ये ध्यान ही मत दो की कौन क्या कहता है बस वो करो जो अच्छा है और सच्चा है।
सालों से जीवन उस दौर से गुजर रहा है जहां...हम दो कदम चलते है और एक पल को रूक जाते है , मगर इस एक पल में जिन्दगी हमसे चार कदम आगे चली जाती है, 
हम फिर दो कदम चलते है और एक पल को रूकते है , मगर जिन्दगी हमसे फिर चार कदम आगे चली जाती है।

एक बात बहाेत ही अच्छे से समझ गए कि सच को खरीदने की हैसियत किसी में नहीं है, इसलिए ही नीयत, सीरत, सच्चाई के सौदे नही हुआ करते हैं। जब शांति से करने लगे हिसाब-ए-ज़िंदगी तो हम खुद भी रो बैठे, बहुत ही मलाल हुआ कि, हम तो 
गिनते रहे सालों को और लम्हों को ही खो बैठे हैं। झूझती रही... .टूटती रही …बिखरती रही …कुछ इस तरह से हमारी ज़िन्दगी निखरती रही। 
कई बार ऐसा हुआ कि जिन्दगी को जीतते देख हम मुस्कुराते रहते और जिन्दगी हमारी मुस्कराहट पर हैरान सी होती रहती , और ये सिलसिला काफी समय से यूँ ही चलता रहा हैं।

यह तो तय है, हम किसी को जो भाव या जो सम्मान देते हैं ... वो विचरते हुए , हमें खोजते हुए हमारे पास आता ही है।अगर हममें कड़ी बात सुनने की हिम्मत नही है तो, फिर किसी को कड़ी बात कहने का साहस भी नहीं करना चाहिए हमें। एक बात बहुत बार देखी ही नहीं बल्कि हमें खुद महसूस भी हुई है , बुरा व्यक्ति उस समय और भी बुरा हो जाता है जब वह अच्छे होने का ढोंग करता है।
अच्छे लोग कभी किसी को बुरा नही कहते, और बुरे लोग कभी किसी को अच्छा नही कहते,यह तजुर्बा भी हमारे लिए बेमिसाल रहा है । चल रही जिंदगी में महसूस किया दूसरों की प्रशंसा करने वाला इंसान बड़ी सोच और बड़े दिल का होता है, हीन भावना , अहंकार और ईर्ष्या से ग्रसित व्यक्ति दूसरों की प्रशंसा करने में खुद का अपमान मेहसूस करता हैं। कई बार लोगों ने सवाल किया, तुमलोग हारकर भी मुस्कुराते रहते हो ,क्या तुम्हे दुःख नहीं होता हार का?तब हमेशा हमने आत्मविश्वास से यही कहा, हमें पता है समय का चक्र घूमता रहता है और एक ना एक दिन ऐसी सीमा रेखा अवश्य आएगी, जहां से जिन्दगी चार तो क्या एक कदम भी आगे नहीं जा पायेगी और तब जिन्दगी हमारा इंतज़ार करेगी और हम तब भी अपनी रफ़्तार से यूंही चलती रुकते वहां पहुंचेंगे। 
वक्त के साथ साथ सभी अच्छा बुरा समझने की हमारी क्षमता बढती गई। अच्छी तरह से समझ गए, हर किसी के लिए अपने आप को अच्छा साबित करने की जरुरत नही है। उनके लिए आप आज भी बेहतरीन है जो आपको *दिल* से जानते है । इंसान को स्वयं की नजर में सही होना चाहिये , बाकी दुनिया का क्या,वो तो " *भगवान* " से भी दुखी: हो जाती है। जीवन तो बस ठहराव और गति के बीच का संतुलन है।
अब वक़्त आयेगा, हम संतोषजनक, खुशमिजाज स्वाभाविक स्थिति में 
एक पल रुक कर जिन्दगी की तरफ देख कर खिलखिलाते हुए मुस्कुरायेगें, बीते सफर को एक नज़र देख अपने कदम फिर बढ़ाएंगे , ठीक उसी पल हम जिन्दगी से जीत जायेगें , कभी हम अपनी हार पर भी मुस्कुराये थे और अब अपनी जीत पर भी लाजवाब मुस्कुरायेगें। जिन्दगी अपनी जीत पर भी कभी ना मुस्कुरा पाई थी और अपनी हार पर भी न मुस्कुरा पायेगी,बस तभी हम जिन्दगी को जीना सिखाएंगे।
एक बात शतप्रतिशत सत्य है कि बे कसूर लोग भी बड़े दिलचस्प होते हैं शर्मिंदा हो जाते हैं, खता के बगैर भी। 
ये जो हमारे हालात हैं एक दिन सुधर ही जायेंगे, मगर तब तक कई लोग हमारे अपने दिल से उतर जायेंगे। नसीब नसीब की बात होती है। कोई नफरत देकर भी बेपनाह प्यार पाता है। और कोई बेपनाह प्यार देकर भी यहाँ, बस खाली हाथ रह जाता है। 
कहते हैं लोग की दुनिया बड़ी ज़ालिम है,पर क्या कभी किसी ने,सुधरने और सुधारने की कोशिश की है?गलत को देख मुँह मोड़ना, सही को भी गलत बनाना,बस यही दस्तूर जारी है, इस दुनिया का बदनाम होना अभी भी जारी है। ​हमारे बारे में गलत धारणा रखने वालों अपनी सोच को थोड़ा बदलकर तो देखो, हमसे भी बुरे हैं लोग, आप सभी पूरी ईमानदारी से घर से निकलकर तो देखो।

भगवान् पर पूरा भरोसा है तभी तो परवाह नहीं करते उनके तानों की, पछतावा होगा उन सभी को एक दिन जब वक्त हमारा हाेगा। लहरें चाहे बन जाये तुफान, कश्ती का काम है बहते रहना, कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना।
ऐ ज़िंदगी..तुम्हीं मुश्किलों के कुछ हल दें 
फुर्सत के कुछ पल दे ...! दुआ है दिल से सबको आज से बेहतर कल दे..
ज्यादा ख्वाहिशें नही ए जिन्दगी तुझसे ...सिवाय इसके कि ,जिंदगी का हर लम्हा ,पिछले से बेहरतीन हो।

सभी से हाथ जोड़कर गुजारिश है 
जेब में क्यूं रखते हो खुशी के लम्हे 
बाँट दो इन्हें, ना गिरने का डर, ना चोरी का भय।
 
 सविता

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