“…..ख्याल….”
उस मोड़ पर लगा जैसे सिर्फ सड़क ही नहीं जिंदगी भी मुड़ सी गई है .... "खयालों में...."
चौराहे की लाल हरी बत्तियाँ मुझे बढ़ने ही नहीं देती आगे एक भी कदम....।उतर गया हूँ वक्त की गाड़ी से और बढ़ रहा हूँ पैदल…