बोकारो का हैमबर्गर
चाचा २ ठो समोसा लाव हो। नटखट स्वीट्स के सामने खड़े होके बतियाते हुए समोसा और ऊपर मीठी चटनी। रवि कुमार सिंह और आशा सिंह का रोज का मन बहलाव था। रवि कुमार सेक्टर ३ के निवासी थे , इ टाइप क्वार्टर के खोली में रहते थे , BIV ३ सी के अव्वल बैक बेंचेर और रोज़ शाम को हाई स्कूल मैदान के चैंपियन बल्लेबाज़ थे। आशा सिंह बिनोद सर के आर्ट क्लासेज की टॉप स्टूडेंट थी, सेक्टर ४ F के आलीशान क्वार्टर में PG वोडेहोउसे की कहानियां पड़ती थीं और दिल्ली पब्लिक की टॉप स्टूडेंट । कहानी में क्लीशे तो इतना था की कारन जोहर की फिल्म बन जाए , लेकिन सौ बात की एक बात ये थी, कि दोनों का टाइम पास नटखट के समोसे और मीठी चटनी में होता था। प्यार मोहब्बत की कोई बात नहीं , बस प्रसाद सर की छड़ी के कुछ निशान और वर्मा मैम के पुरस्कार रूप सेलो ग्रिपर पेन की बातें। रवि को पसंद था समोसे का कुरकुरा हिस्सा और आशा मैडम थीं चटपटे आलू की दीवानी। तो समोसे का बंटवारा भी बड़े आराम से हो जाता था। लेकिन जेहन में पहले तो ये बात आयी होगी न की इस चटपटे आलू और कुरकुरे मैदे की ये रोज़ की बातें शुरू कहाँ से हुई। तो भाई कहानी में भी तो यही मज़ा है न। सारी बातें पहले बता देंगे तो आप आगे क्यों बढिगे। 
तो बात निकली ऐसे। 
 रवि कुमार ने नया नया स्कूटर चलना सीखा था , अपने पिता से पूछते तो पहले गणित के अंकों की बात होती और फिर चप्पल से कुटाई। स्कूटर न मिलता वो अलग , तो इसलिए अपने बबलू कुमार से गयी। बबलू कुमार इस्पात विद्यालय के अव्वल छात्रों में से एक थे। अब दिल्ली पब्लिक वाली बात नो नहीं लेकिन इस्पात विद्यालय के अव्वल विद्यार्थी का मुघालता अलग था। इस चक्कर में उनकी जबान चल जाती , और रवि सिंह उनको कभी कभी लाड से कूट देते थे। लेकिन तबहिये बबलू के पापा का E 0 आ गया और ख़ुशी में सिटी सेंटर के वरुण ऑटो से नयी स्प्लेंडर ली गयी। तो अब पुराना स्कूटर मिला बबलू कुमार को और तभी से वो रवि सिंह के घनिष्ट मित्र बन गए। लाइब्रेरी वाले फील्ड में चार बार बजाज चेतक को राणा रवि प्रताप ने पटका और एक बार तो चेतक छाती पे भी चढ़ गया लेकिन बिना किसी हड्डी गुड्डी टूटे रवि सिंह ने स्कूटर चलाना सीखा। अब हर रविवार जब पिता जी दोपहर की झपकी ले रहे होते तो वो निकल जाते मटरगश्ती पे। बबलू कुमार पीछे बैठ कर हवा से बातें करना सीख रहे थे। कभी राम मंदिर में गरमा गरम जलेबी कभी सेक्टर ९ में झाल मूरी। ज़िन्दगी में बड़े मज़े थे। अक्टूबर आया और साथ में आये दुर्गा पूजा के पंडाल। कभी राम मंदिर में गरमा गरम जलेबी कभी सेक्टर ९ में झाल मूरी। ज़िन्दगी में बड़े मज़े थे। अक्टूबर आया और साथ में आये दुर्गा पूजा के 1 b पंबे डाल। १ बी में मंगलयान का प्रतिरूप बना था , ४ डी के पंडाल में सजीव दुर्गा बड़ी विख्यात थी और १ सी के बंगाली पूजा पंडाल में इस बार की खिचड़ी कुछ ज्यादा ही स्वाद थी। और ९ का मेला इस बार शायद कुछ नए और ज्यादा डरावने झोले लेकर आया थे। पुराण स्कूटर चललते हुए भ रवि को नयी नवेली मोटरसाइकिल की शोभा लग रही थी। सप्तमी की भरी दुपहरी में माता श्री से दम्म भर गाली सुनके रवि सिंह बबलऊ के साथ खिचड़ी खाने की जल्दी में निकले थे। जल्दी दौडाव हो , लेट करब ता कुच्चो न मिली , सालआ सबहीयां आजवळां खिचड़ी खाये खातिर। बबलू सिंह अपने नए मित्र को जीवनोपयोगी जानकरी प्रदान क्र रहे थे। जल्दी में स्कूटर को आम के पेड़ के नीचे लॉक लगा के दौड़ते दोनों मित्र जब पंडाल के पास पहुंचे तो धक्का मुक्की देख के उनका पूरा जोश ठंडा पद गए। कहले रहली रह जल्दी चले खातिर , लागल रहल साज सिंगार में , अब खा ला खिचड़ी। बबलू सिंह का पूरा उत्साह बैलन की हवा माफिक निकल गया था। ऐसे कसिए हो , ऑयली है त खिचड़ी ता खा के जायब। चला। दोनों धक्का मुक्की में टूट पड़े और कई किंकियाते हुए बालकों को उत्साह से धक्का मारते हुए आगे खड़ी आशा सिंह से जा टकराये। जब वो पलटी तो उनकी आँखों में दहकटे शोले देख दोनों मित्रों की विजयी मुस्कान फीकी पद गयी। बरात में आयल बार , अइसन लपडियायब की सब हड़बड़ी भुला जायब . आपस पड़ोस वाले कनखी से इस हल्ले की वजह ढूंढने में लगे और अजय सिंह की स्कूटर सीखने के बाद की विजयी मुस्कान कहीं लापता हो गयये सिंहनाद सुन के दोनों लड़के थोड़ा सहमे और फिर एक दुसरे से आँखें बचआ के चुप छाप खड़े हो गए . समय आने पर खिचड़ी तो मिली लेकिन एक लड़की के द्वारा इतना शर्मिंदा होने के बाद उस हलकी मीठी हलकी तीखी खिचड़ी उसमें बड़े वाले आलू और परवल दुम्म , किसी में भी वो स्वाद न रहा था .भरते सा मुंह लेके दोनों मित्र वापस चल दिए और अपने पीड़ाक को जाते मज़े में खिचड़ी सुडकते और जाते देखते रहे। 
१ सी के पंडाल की इस पीड़ा ने रवि सिंह के जेहन पे बड़ा आघात किया था, जिससे उबरने का मौका वो तिलमिला के ढूंढ रहे थे। मौका मिला और वो भी अप्रत्याशित। जीतेन्द्र में रवि सिंह मित्रों के साथ भाई की नयी फिल्म देखने निकले थे , शुक्रवार को मिश्र सर की ट्यूशन से गुटली मार के। वहां उन्हें परिवार के साथ परेशान

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