रिश्ते

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रिश्ते बनते हैं, बिखरते हैं
कुछ जीवन भर भी चलते हैं

कभी दूरियाँ होती हैं, कभी मजबूरियाँ होती हैं
कभी वक़्त भी जीमेदार होता है
तो कभी बातों ही बातों में राई का पहाड़ होता है
ना जाने कब रिश्ते बनते हैं फिर बिखरते हैं
एक तरफ़ रिश्ते बिखरते हैं तो दूसरी तरफ़ नय रिश्ते बनते हैं

जीवन के सफ़र में रिश्ते कुछ छूट तो जाते हैं
लेकिन ख़ूबसूरत यादें उन रिश्तों में एक दिया सा जलाते हैं

रिश्ते बड़े नाज़ुक से होते हैं
प्यार, दुलार, होने का ऐहसास, सब चाहते हैं
ना मिलने पर धीरे धीरे खो से जातें हैं
रिश्ते तो वाइन की तरह भी होते हैं
जितने पूराने होते हैं उतने निखरते हैं

रिश्ते ज़रूरी होते हैं
ज़िंदगी बिताने के लिए
कभी रोने तो कभी मुस्कुराने के लिय
कभी साथ बैठ घंटो वक़्त बिताने के लिए
कभी खाने में स्वाद बढ़ाने के लिए
कभी नाचने गाने के लिए, बीते लम्हों को एक बार फिर से दुहराने के लिए

रिश्ते बनेंगे, बिखरेंगे, फिर से बनेंगे
रिश्ते हैं यादों को बनाने के लिए
ये रहे या ना रहे यादें हमें झकझोरेंगीं
उन रिश्तों की मिठास बिखेरेंगी

चलो, यादों के बक्से में हर पल कुछ नया डालते हैं
कुछ पूराने रिश्तों को निभाते हैं और कुछ नया बनाते हैं
कुछ ढीले रिश्तों की डोर छूट ना जाए उसके पहले उसे फिर से एक बार सम्भालते हैं
ख़ुशियाँ बाटते हैं और मिल के एक ख़ुशियों वाली दुनिया बनाते हैं