उर्दू!

फिर एक बार, दिल को छू गया कुछ,
फिर कहीं से हल्की सी आवाज़ आयी है,
हिंदी माँ के बेटे को
फिर उर्दू की याद आयी है।

फिर मिज़ाज आशिक़ाना है आज
लब पर दबी-छुपी वो बात आई है
फिर धड़कन छूट गए दिल से,
किसी मिसरे पे दिल से दाद आयी है

शायरों की महफ़िल की खुशबू,
कुछ गूंजते ग़ज़लों की आवाज़ आयी है
यूँ फिर लगा जैसे कोई पुकारता हो,
शायद तभी फ़िर उर्दू की याद आई है।