Jul 26, 2017 · 1 min read

वोह रात कोई और होगी
जब हम घुटने टेकेंगे
वोह रात कोई और होगी
जब सब सपने सोजाऐंगे
अभी तो वोह रात है
जब बिस्तर न बनेगा
जब ख्वाहिशों के दिये जलाऐंगे ।

वोह रात कोई और होगी
जब हम घुटने टेकेंगे
वोह रात कोई और होगी
जब सब सपने सोजाऐंगे
अभी तो वोह रात है
जब बिस्तर न बनेगा
जब ख्वाहिशों के दिये जलाऐंगे ।