Simran Ahluwalia
Jul 26, 2017 · 1 min read

वो ख्वाहिशें ही क्या

जो मंज़िलों के रास्तों को धुंधला कर दें?

देखो तो ज़रा

कितना कमज़ोर है ये दिल

अपनी नाकाबयाबी का ज़िम्मा भी ख्वाहिशोें पर डाल दिया ।

    Simran Ahluwalia

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    Unravelling the poetry of life