Child Hunger in India

हर रोज़ इतनी मासूम जाने भूख से चली जाती जितनी शायद द्वितीय विश्वयुद्ध में भी नहीं गयी होंगी …हम अपने देश को बम से बचाने में लगे हुए है ..लाखो करोडो खर्च कर रहे है …..लेकिन उससे ज़्यादा जान तो हर रोज़ बच्चे ,बुज़ुर्ग और उन परिवारों की चली जाती है, जिन्हें भूखे पेट सोना पड़ता है….मैं सुरक्षा के खिलाफ नहीं हूँ ..पर मैं व्यवस्था में बदलाव चाहता हूँ ..ताकि उचित आनाज उन भूखे लोगो के पास पहुँच सके जिनको ज़रुरत है …

मैं उन लोगो के खिलाफ हूँ जो देख के भी नहीं देखते ..लोगो का दर्द …जो आँखे मूंदे आगे बढ़ जाते है …हम लाखो करोडो का अनाज हर रोज़ नुकसान करते है …शादी हो या कुछ और कभी किसी बहाने से बस नुकसान करते है …दे सकते है ज़रुरत मंदो को पर देते नहीं ..क्योंकि कोई मरे तो मरे इससे हमें क्या ..

.हम तो बच ही जायेंगे क्योंकि हमारे पास है ……२ रोटी या ४ पैसे दे देने से या किसी भूखे को खाना खिला देने से हम सब का खाजाना जो काम हो जायेगा ..यही छोटी सोच हमें एक दूसरे की मदद करने से रोक रही है ..

इसी सोच की वजह से हम बम से बचने में लगे है जबकि हर रोज़ इतने लोग भूख से मरते है जितने शायद कभी बम से न मरे ……..