Logic Over Sake in Hindi

दो साकी और एक तर्क

Shashi
Shashi
Sep 8, 2018 · 15 min read

यह कहानी मान्यवर लेखक हरुकी मुराकामी द्वारा लिखित पुस्तक "रंगहीन त्सुकूरो ताज़ाकी" से ली गई है। उम्मीद है कि यह कहानी पढ़के आप इस लेखक की किताबें पढ़ना चाहोगे। इस कहानी में दो पुरुषों के पात्र हैं और यह कहानी दक्षिणी जापान में ओईता पहाड़ों के शांत और गर्म पानीके झरनों के बिच स्थित है।

यह 1960–70 के दौरान की बात है जब हर स्थापित संस्थाओ के विरुद्ध आंदोलन चल रहा था। और विश्वविद्यालयों से छात्र अपनी खुदकी राह ढूंढने पढ़ाई छोड़ जा रहे थे। इस कहानी का पात्र, हाईदा, भी 20 साल की उम्र में कॉलेज को छोड़के उन पहाड़ों में एक सराय में मामुली से नौकरी करने आ गया था। उसको इस बातसे खुशी थी कि, इस शांत शीतल पहाड़ी वातावरण में, टोक्यो की हलचल से बहोत दूर, वह शांति से किताबें पढ़ सकता था, और अपने विचोरोमे और ख़यालोंमें खो जाता था। उसे अब असली दुनिया में क्या हो रहा था इसकी कोई परवाह नहीं थी।

दो महीने गुजरनेके बाद उस सराय में रहनेवाले एक अतिथि के साथ हाईदा की धीरे धीरे जानपहचान हो गयी और दोस्तिसी बनने लगी। उस अतिथि की उम्र कुछ 40–50 साल की होगी। आदमी का नाम था मिडोरिकावा। उसकी दिनचर्या में शामिल था खुली हवा में गर्म पानी के झरनेमें स्नान करना, पास की पहाड़ियों में घूमना, या कोट्टात्सु के गर्म मेज पर पैरोंको रखकर पढ़ना। और हर शाम को वह गर्म साकी की सिर्फ दो, ज्यादा नहीं और कम नही, छोटी बोतलों का आनंद लेना नहीं भूलता था। हाईदा को किताबें पढ़ते हुए देखकर मिडोरिकावा इस युवा कर्मचारी में गहरी दिलचस्पी लेने लग गया।

मिडोरिकावा एक प्रतिभाशाली पियानोवादक भी था। हाईदा के साथ एक दिन वो पास के स्कूल में पुराना पियानो बजाने जाता है। उस दिन हाईदाको मिडोरिकावामें उसकी कला के कारण एक असीम आनंद दिखाई दिया, लेकिन एक तरह की गहरी नाराजगी और दुख भी दिखाई दिया। हाईदा तब सोचने लग गया कि क्या कोई कला या प्रतिभा एक वरदान है या अभिशाप भी हो सकता है? या फिर जैसे हर वरदान अपनी कोखमे एक अभिशाप भी ले आता हो?

एक दिन जब हाईदा पिछवाड़े में लकड़ीयां काटके ले जा रहा था, तो मिडोरिकावा उसके पास आया।

"कामके बाद क्या कर रहे हो?" उसने पूछा।

"कुछ खास नहीं," हाईदा ने जवाब दिया।

"तो ठीक है, शाम को मिलते है। खाने पे।" मिडोरिकावा ने कहा।

"मैं साडे सात बजे खाली हो जाऊंगा।"

"ठीक है। तब आजाना। "

जब हाईदा मिडोरिकावा के कमरे में पहुंचा तो उसने पाया कि गर्म साकी की बोतलों के साथ-साथ खाना भी तैयार था। वो दोनों खाना खाने बैठ गए। मिडोरिकावा खाना कम और साकी ज्यादा पी रहा था। जब उसे पता चला कि हाईदा दर्शनशास्त्र, या फिलोसोफी, की पढ़ाई कर रहा था, तो उससे तर्क वितर्क के बारे में बाते करने लग गया।

"तो तुम तर्क में विश्वास करते हो? "मिडोरिकावा ने कहा।

"हाँ। मैं तर्क में विश्वास करता हूं। हर चीजमें तर्क जरुरी है," हाईदा ने जवाब दिया।

"तो फिर तुमको तर्क से ना समझ पाए ऐसी बातें पसंद नहीं है?"

"ऐसा नहीं है। मैं उन चीजों के बारे में सोचने से इनकार नहीं करता जो तार्किक नहीं हैं। ऐसा नहीं है कि मुझे तर्क में ही गहरा विश्वास है। मुझे लगता है कि जो बातें तार्किक है और जो नहीं है उनका कहीं मिलाप जरूर होता है, और उस चौराहेको ढूंढना महत्वपूर्ण है। "

"तो क्या तुम शैतान में विश्वास करते हो? क्या उसमे तर्क है?"

"शैतान? तुम्हारा मतलब सींग वाले डरावने राक्षससे हैं? "

"हाँ। चाहे वास्तव में उसके सींग है या नहीं यह जरूरी नहीं है। "

"यदि आप शैतान को बुराई का एक रूपक समझते हैं, तो निश्चित रूप से मैं उस पर विश्वास करता हूं।"

"और समझलो अगर यह बुराईका रूपक शैतान वास्तविक में तुम्हारे सामने आजाता है, तो विश्वास कर सकते हो?"

हाईदा ने कहा, "पता नहीं । मैं तब तक नहीं कह सकता जब तक कि मैं उसे वास्तव में देखूं नहीं।"

"लेकिन शैतानको वास्तवमे देखनेके बाद तो बहुत देर हो सकती है।"

"बराबर है। पर हम यहाँ काल्पनिक बाते कर रहे हैं। गहराई में जानेके कुछ ठोस उदाहरणों की जरूरत है, और इस परिकल्पना के लिए सीमाएं जरूरी है। जैसे खाईपे बने पुल पर आने जाने के रास्तेके अलावा सुरक्षाकेलिये मजबूत सीमाएं भी जरूरी है। एक परिकल्पना के साथ आप जितना आजादीसे आगे बढ़ते जाते हो, किसी ठोस सिमाके बिना उसका निष्कर्ष असमाधानकारक साबित हो सकता है,जैसे परिकल्पनाओंकी गीली फिसलाऊ ढलान। "

"उदाहरण?" मिडोरिकावा ने कहा। साकी को पीने के बाद वह बोला, "मानो उदाहरण मिल भी जाये, बात इसपर अटक सकती है कि तुम उसे स्वीकार करते हो या नहीं, और यदि तुम इसे मानते हो या नहीं। आखिर फिरसे उस सामने आए हुए शैतान के रूप पर विश्वासकी बात आती है, क्योँ? और यहां तर्क मदद नहीं कर सकता। दिमागी तर्क के पार मानसिक छलांग लगाना जरूरी हो जाता है।"

"हाँ, शायद। पर तर्क का कोई सुविधाजनक किताब तो नहीं है जिसमें आप हर सवाल के जवाब देख सको। हो सकता है कि शुरू में आपको कोई तर्क ना मिले, पर कुछ समय बितनेके बाद आप किसी भी दिए गए चमत्कारी परिस्थिति में तर्क देख सकते हो। "

"लेकिन तब तक तो बहुत देर हो सकती है। शैतान तो तुम्हारे सामने है। क्या तर्क तुमको बचा सकता है?"

"लेकिन तर्कका और शैतान के सामने आने पर देर हो जाने से कोई लेनादेना नहीं है।"

मिडोरिकावा मुस्कुराया। "यह बात भी सही है। यह भी अपनेमे एक बढ़िया तर्क है। इसमें कोई गुंजाइश नहीं। "

"क्या आपने कभी इस तरह का अनुभव किया है? कोई चमत्कारी बात को स्वीकार करना, उसपे विश्वास करना, तर्क से परे छलांग लगाना? " हाईदाने पुछा ।

"नहीं," मिडोरिकावा ने कहा। "मुझे दोनो में भी विश्वास नहीं है। तर्क में भी नहीं, और चमत्कार में भी नहीं। भगवान या शैतान में भी नहीं। और ऐसी बातका मुझे कोई अनुभव नहीं, और मेरी जिंदगीमें तर्क से परे छलांग लगाने की तरह भी कुछ हुआ नहीं है। मैं चुपचाप सबकुछ जैसा है वैसे स्वीकार करता हूं। पर यह वास्तव में मेरी मूल समस्या भी है। मैं व्यक्ति और वस्तु के बीच के भेदको देख नहीं सकता। "

"लेकिन आप तो बहोत अछे संगीतकार हैं।"

"तुमको ऐसा लगता है?"

"बिल्कुल। मैं संगीत के बारे में ज्यादा नहीं जानता, लेकिन मैं इतना कह सकता हूं की आपका संगीत लोगोंको किसी अनोखी दुनिया मे ले जाता है। "

मिडोरिकावा अपना सिर हिलाकर बोला, "प्रतिभा कभी-कभी अच्छी बात भी हो सकती है। नाम, पैसा, शौहरत, हसीन औरतें सब मिल सकती है। उस हद तक प्रतिभा का होना ना होने से बेहतर है। लेकिन इसके साथ जरूरी है शारीरिक और मानसिक सेहत, और मेहनत। दाँत के मामूलीसे दर्दसे भी आपकी एकाग्रता गायब हो सकती है। एक साधारण हाथका दर्द और मेरा पियानो बजाना बंद। मानव शरीर बहोत नाजुक है। प्रतिभा पे ज्यादा भरोसा नहीं कर सकते।"

हाईदा ने जवाब दिया, "माना की हुन्नर क्षणिक भी हो सकता है और पूरे जीवन भर तक कोई इसे बनाए नहीं रख सकता है। लेकिन उस एक क्षण के लिए उसकी कला के द्वारा वह उन चोटियों को छू सकता है जो आम लोगों के बसमे नहीं, एक विशाल आध्यात्मिक छलांग, जैसे उस चोटिपे मानो भगवानसे मुलाकात।"

मिडोरिकावा ने जवाब दिया, "जैसे किसी मशहूर संगीतकार का संगीत कभी मरता नहीं। क्या यही मतलब है तुम्हारा?"

"यह एक उदाहरण हो सकता है।"

"पर उस तरह की चोटिकि प्रतिभा हमेशा करोड़ों में एक होती है। और ऐसे हुन्नर के लिए उनको बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है - पूर्वनिर्धारित सीमित जीवन जीना पड़ता है और के बार कम उम्र में मौत। उनको अपने जीवन का जैसे सौदा करना पड़ता हैं। कभी भगवानसे और कभी शैतान के साथ भी, शायद। " मिडोरिकावा ऐसे कहके चुप हो गया।

वह आगे बोला, "पर यह सब छोड़ो, मैं तुम्हें कुछ और बात बताना चाहता हूँ। थोड़ी गंभीर सी बात लगेगी तुम्हें— मैं मौतके बहोत करीब हूँ। मेरे पास केवल एक महीना बाकी है। "

इस बातको अचानकसे सुनके अब हाईदा की बारी थी चुप हो जाने की। उसको कोई शब्द सूझ नहीं रहे थे।

मिडोरिकावा ने कहा, "मैं किसी बीमारी या किसी चीज से जूझ नहीं रहा हूं। मैं अच्छे स्वास्थ्य में हूं। और मैं आत्महत्या का भी विचार नहीं कर रहा हूं। यदि तुम ऐसा कुछ सोच रहे थे, तो निश्चिंत हो जाओ। "

"आप कैसे जानते हैं कि आपके पास केवल एक महीना बाकी है?" हाईदा ने कहा।

"किसी ने मुझे कहा था कि आपके पास रहने के लिए केवल दो महीने बचे हैं। वह बात है एक महीने पहले की।"

"ऐसी अजीब बात बताने वाला कौन हो सकता है?"

"वह डॉक्टर या भविष्यवेत्ता नहीं था। बस एक साधारण व्यक्ति था। हालांकि उस समय उसकी भी मौत होनेमेही थी। " हाईदा ने कोशिश करि पर उसे यह बात काफी बेतुकी लग रही थि और उसे कोई तर्क मिल नहीं रहा था। वह फिर बोला, "तो क्या तुम ... यहाँ अपने आखरी दिन बिताने आये हो?"

"हाँ, शायद।"

"मैं आपकी बात पूरी तरह समझ नहीं पा रहा हूँ, लेकिन क्या आप किसी भी तरह से इस मौत से बच नहीं सकते हैं?"

"हाँ, एक रास्ता है," मिडोरिकावा ने कहा। "मैं अपने इस मौत की क्षमता को किसी और को दे सकता हूँ, एक पूर्व नियोजित मौतका सिक्का। क्यों? …मेरा मतलब है की, अपनी जगह तुमको किसी और को मरनेके लिए ढूंढ़ना है। उसे इस सिक्के को देकर बताओ, 'ठीक है, यह सिक्का लो, अब तुम्हारी बारी है।,' और फिर छोड़ दो। ऐसा करो, और तुम मौत से बच जाओगे। … लेकिन मैं ऐसे कुछ मरना नहीं चाहता हूं। मैं लंबे समय से जल्दसे जल्द मौतकी सोचहि रहा था। शायद मौतही मेरेलिये ठीक रहेगा।"

"तो आप, जैसे हो जहां हो, मरनेके लिए तैयार है?"

"हाँ, जीवन जैसे अब बहोत हो गया है और मैं उब चुका हूँ। मुझे, में जैसा हूँ वैसे, मरनेमें कोई तकलीफ नहीं है। और सबसे बड़ी बात यह है कि मेरे पास इतनी शक्ति नहीं है कि मैं बाहर जाऊँ और अपनी खुदकी मौत के सामान की तलाश करूँ। लेकिन इस मौतके सिक्केसे जो बिना कुछ काम किये आसान वाली मौत मिल रही है उसे खुशीसे स्वीकार कर सकता हूं।"

"लेकिन कैसे कोई उस मौतका सीक्का किसी और को सौंप सकता है?"

मिडोरिकावा एकदमसे बोला, "बहोत आसान है। उस व्यक्ति को सिर्फ यह बात समझना है, बातको स्वीकार करना है, और पूरी सहमति दनी है। कोई हस्ताक्षरित, मुहरबंद दस्तावेज़ या अनुबंध की आवश्यकता नहीं है। "

हाईदा नीचे देखते हूए बोला, "लेकिन किसीको ऐसी चिजकेलिये तैयार होना मुश्किल हो सकता है, अगर इसका मतलब है कि वो जल्द ही मरने वाला है।"

"बराबर है," मिडोरिकावा ने कहा। "इस बात को किसी के भी साथ नहीं कर सकते। किसी के कान में फुसफुसा नहीं सकते की, ‘क्षमा करें, लेकिन क्या आप मेरी जगह पर मरना चाहेंगे? बड़ी सावधानी से उस आदमी को चुनना होगा। और यह थोड़ा मुश्किल हो सकता हैं। "

मिडोरिकावा कमरे की चारों ओर नजर घूमाते हुए गलेकी खराश साफ करने के बाद बोला, “एक बात बताऊ, हर व्यक्ति की एक आभा होती है और उसका एक खास रंग होता है।"

"क्या?"

“हाँ। हर व्यक्ति का अपना अनूठा रंग होता है। और मैं उन रंगों को स्पष्ट रूप से देख सकता हूं। "

मिडोरिकावा साकी का धीरे धीरे स्वाद लेने लगा।

हाईदा ने पूछा, " तो क्या कोई रंगों का पता लगाने की क्षमता अपने जन्मसे पाता हैं?"

मिडोरिकावा ने अपना सिर हिलाया। "नहीं, यह क्षमता कोई जन्म से नहीं पाता है; और यह एक अस्थायी क्षमता है। तुम इसे मौतका सिक्का स्वीकार करने के बदले में प्राप्त करते हो। और यह सिर्फ एक व्यक्ति से अगले व्यक्ति को ही दीया जा सकता है। अभी मौतके स्विकारनेके साथ साथ इस क्षमता को मुझे सौंपा गया है। "

हाईदा थोड़ी देर के लिए चुप था। उसको फिरसे कोई शब्द सूझ नहीं रहे थे।

मिडोरिकावा ने कहा, "मैं कई आभाओ के रंगोको पसंद करता हूं और मुझे कुछ आभाएँ पसंदभी नहीं है। कुछ लोगों के पास सुखद रंग होते है, और कुछ लोगोंके पास उदास रंग। कुछ लोगों के पास बहुत गहरा रंग होता है, और कुछ लोगों के पास एकदम हलका रंग होता है। लेकिन यह सारे रंग देखके इस शक्तिसे एक थकाव आजाती है, क्योंकि आपको यह सारे रंग दिखते है और देखने पड़ते है, भले आप चाहते हो या नहीं। मुझे इसी कारणसे भीड़ ज्यादा पसंद नहीं है। यही कारण है कि मैं इस एकांत पहाडों में शहरसे दूर आया हूँ। "

हाईदा कुछ समझ नहीं पा रहा था। उसने कहा, "तो अभी आप क्या मेरी आभाका रंग देख पा रहे हो?"

“हां बिल्कुल। हालांकि मैं तुम्हे बताने वाला नहीं हूं," मिडोरिकावा ने कहा। "मैं ऐसी आभा ढूंढ रहा हूँ जिसका एक निश्चित चमक है और एक निश्चित रंग है। उन्हीं लोगोंको मैं मौत का सिक्का दे सकता हूं। मैं इसे किसी को भी नहीं सौंप सकता हूं। "

"क्या उस रंग और चमक वाले बहुत सारे लोग हैं?"

"बहोत सारे नहीं। मेरा अनुमानसे शायद हजारों में से एक ऐसा होगा। और उन्हें खोजना इतना आसान नहीं हैं, लेकिन असंभव भी नहीं है। लेकिन सबसे मुश्किल यह है कि उनके साथ इस बातकी गंभीरता से चर्चा करने का अवसर। जैसा कि तुम कल्पना कर सकते हो, यह आसान नहीं है। "

"लेकिन वो किस तरह के लोग होंगे जो किसी औरके लिए मरने को तैयार हो जाएं, जबकि वो शायद उनको जानतेभी नहीं हो? "

मिडोरिकावा मुस्कुराया। "किस तरह के लोग होंगे मैं वास्तव में नहीं कह सकता। मुझे पता है कि, उनके पास एक निश्चित रंग है, जो उनके शरीर को रेखांकित करता है। पर ये आभा तो केवल बाहरी गुण हैं। मेरी व्यक्तिगत राय है की ये वो लोग हैं जो तर्कके बाहर छलांग लगाने से डरते नहीं हैं। क्यों? इसके कई कारण हो सकते है। "

“ठीक है, माना की उनको छलांग लगाने से डर नहीं हैं, लेकिन वो छलांग लगा क्यों रहे हैं?”

मिडोरिकावा ने थोड़ी देर के लिए कुछ नहीं कहा। चुप्पी में, झील का प्रवाह अधिक तीव्र लग रहा था। अंत में, वह हंसते हुए बोला, "अब में तुम्हे ऐसी बात बताऊँगकी तुम मेरा सिक्का पाना चाहोगे।"

हैडा ने कहा, "बताइये।"

"जब तुम मौत के सिक्के का स्विकार कर लेते हो, तब तुमको असाधारण क्षमता मिलती है। एक विशेष शक्ति। लोगों की आभाका रंग को समझना उस शक्ति का एक छोटा हिस्सा है। इस शक्तिमें तुम्हारी चेतना का विस्तार करने की क्षमता है। तुम आस-पास की हर चीज और भी स्पष्ट हो जाती है। तुम्हें हर चीज का अपूर्व ज्ञान आ जाता है और नई चीज़ों दिखने लग जाती है जिन्हें तुमने कभी नहीं देखा है। "

"क्या आपका उस दिन पियानोको इतनी अच्छेसे बजाना उस क्षमता का परिणाम है?"

मिडोरिकावा ने अपने सिर को थोडासा हिला के कहा, "नहीं, मैं पियानो बजानेमें हमेशासेही सक्षम था। मैंने वर्षों से इस तरह खुबिसे दजाया है। वो शक्ति कोई बाहरी, ठोस अभिव्यक्ति में प्रकट नहीं होती। और उससे कोई ठोस लाभ भी नहीं होता हैं। इस अनुभवको शब्दों में व्याख्या करना आसान नहीं है। तुमको इसे समझनेके लिए इसका अनुभव करना जरूरी है। एक बात मैं जरूर कह सकता हूं कि जब तुम इसका एक बार अनुभव कर लोगे तो अब तक देखी दुनिया एकदम रंगहीन दिखाई देगी। उस अदभुत दृश्य का न तो कोई तर्क है और वह न ही कोई अजूबा है। उसमे न तो कोई अच्छाई है, और न ही कोई बुराई है। सब तरहके गुण जैसे एक में विलय हो गये हो। और तुम पाओगेकी तुम खुद भी उस विलय का एक हिस्सा हो। आप अपने भौतिक शरीर की सीमा को पीछे छोड़ देते हो। आप खुद अंतर्ज्ञान बन जाते हो। यह तुमको सब अद्भुत भी लगेगा और निराशाजनक भी, क्योंकि, तबतक की जिंदगी बहोत ही साधारण और मामूली लगने लगती है। "

"और यह जानते हुए भी की तुम्हारी जल्दही मौत होनेवाली है, क्या आपको लगता है कि इस असाधारण अनुभव का कोई मतलब रहेगा?"

"पूर्ण रूप से। यह अनुभव इतना मूल्यवान है। मैं इसकी गारंटी देता हूं। "

कुछ समय के लिए हाईदा शांत था।

"तो अब क्या लगता है तुम्हे? इस मौतके सिक्के को स्वीकार करने में रुचि लेना शुरू कर रहे हैं?" मिडोरिकावा ने कहा और मुस्कुराया।

"क्या मैं एक सवाल पूछ सकता हूं?"

"जरूर।"

"क्या आप संभवतः मुझे बता रहे हैं कि मैं उन कुछ लोगों में से एक हूं जिनके पास वो निश्चित रंगकी आभा और वो चमक हैं? "

"हाँ। मैंने तुम्हें जबसे देखा था तब से ही जानता था की तुममे वो बात है। "

"तो मैं उन लोगों में से एक हूं जो वो छलांग लेना चाहते हैं?"

"यह कहना मुश्किल है। मैं वास्तव में नहीं जानता। ये तुमको अपने आपसे पूछने की ज़रूरत है। क्या तुम वैसी छलांग ले सकते हो? "

“लेकिन आपने कहा था कि आप उस सिक्के को किसी और को देना नहीं चाहते हैं। "

"हाँ। क्षमा चाहता हूँ," पियानोवादक ने कहा। "मैं मरने की योजना बना रहा हूं, और मुझे उस अधिकार को सौंपना नहीं है। मैं एक ऐसे दुकानदार की तरह हूं जो कुछ भी बेचना नहीं चाहता। "

"और यदि आप मर जाते हैं, सिक्के के साथ क्या होता है?"

"अच्छा प्रश्न है। शायद यह मेरे साथ बस गायब हो जाएगा। या हो सकता है कि यह कुछ रूप में रहेगा, और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के साथ फिर से पारित किया जाएगा। मुझे कोई जानकारी नहीं है, और सच पुछोतो मुझे कोई परवाह भी नहीं है। मेरा मतलब है, मैं जाने के बाद क्या होता है इसके लिए मैं ज़िम्मेदार नहीं हूं। "

हाईदा ने इन सभी विचारों को अपने दिमाग में जोडनेकी कोशिश कर रहा था, लेकिन वे कुछ ठीकसे जम नहीं रहे थे, जैसे पतझड़ के पत्ते जमीन पर बिखरे हो।

"तो, मैंने जो कहा वह थोड़ा सा भी तार्किक नहीं था, है ना?" मिडोरिकावा ने कहा।

हाईदा ने स्वीकार किया, "यह एक बहोत ही अछी और काफी सोचमें डालनेवाली कहानी थी, लेकिन विश्वास करना मुश्किल है।"

"क्योंकि कोई तार्किक स्पष्टीकरण नहीं है?"

"हाँ, बिल्कुल।"

"पर, इसे साबित करने का कोई तरीका नहीं है।"

"लगता है की इसे साबित करने का बस एकमात्र तरीका है कि छलांग ले लो, सौदा कर लो, सिक्का ले लो। क्यों? "

मिडोरिकवा सहमति में बोल, "बिल्कुल। जब तक तुम छलांग नहीं लेते, तुम इसे साबित नहीं कर सकते। और एक बार जब तुम वास्तव में छलांग लगाते हो, तो फिर इसे साबित करने की कोई आवश्यकता नहीं रहती। इसमे कोई कोई बीचवाला रास्ता नहीं है। तुम या तो सिक्का लेकर देखलो, या नहीं। एक या दूसरा।"

"क्या आप मरने से डरते नहीं हैं?"

"मैं मौतसे डरनेकी ज़रुरत नहीं समझता हूँ। मैंने देखा है कि मामूली से मामूली, नाकाम और बेकार लोग मर जाते हैं, और यदि वो कर सकते हैं तो मैं भी इसे झेल सकता हूँ। "

"क्या आपने कभी सोचा है कि मृत्यु के बाद क्या आता है?"

"स्वर्ग, नर्क, और पुनर्जन्म जैसी बातें? "

हाईदा ने सहमति में सर हिलाया।

"मैंने अपना मन बना लियाकी उनके बारे में सोचूंगा नहीं," मिडोरिकावा ने कहा कि वह अपने दाढ़ी को घुमाता है। "उन चीज़ों के बारे में क्या सोचना जिन्हें आप जान नहीं सकते हैं? और ऐसीभी बातें हैं जिनको आप समझते हैं, भले ही आप उन्हें साबित न कर सकें। मेरे अनुसार, यह उन परिकल्पनाओंकी गीली फिसलाऊ ढलान से अलग नहीं है जिनके बारे में तुम बात कर रहे थे। "

हाईदा ने गहरी सांस ली। "तुमने मुझे ये सब क्यों बताया?"

मिडोरिकावा ने कहा, "मैंने अब तक किसी को कभी नहीं बताया था, और कभी सोचा भी नहीं था कि बताऊंगा," और साकी का घूंट लेकर बोला, "मैं बस चुपचाप गायब होने जा रहा था। लेकिन जब मैंने तुम्हें देखा, तो मैंने सोचा, अब यहां एक आदमी है मेरी बात कहने और सुनने लायक। "

“और आपको परवाह नहीं है कि मैं आपको विश्वास करता हूं या नहीं? "

मिडोरिकावा थोड़ीसी थकान के साथ बोला, "तुम्हारे विश्वास की मुझे परवाह नहीं है। आज नहीं तो कल तुम्हें विश्वास हो जाएगा। आखिर एक दिन मौत तो सबको आनी है। और जब तुम मौतका सामना करोगे - मुझे नहीं पता नहीं कि यह कब होगा या कैसे होगा - पर इतना निश्चित है कि तुम्हे यह कहानी याद रहेगी। और तुम इसे पूरी तरहसे स्वीकार कर लोगे, और इसके पीछे के तर्क के हर विवरण को समझ जाआगे। वास्तविक और असली एयर सही तर्क। मैंने आज सिर्फ बीज बोया है। "

अब बाहर बारिश हो रही थी, एक मुलायम, शांत बारिश।

"थोड़े दिनों में तुम वापस टोक्यो में कॉलेज जाओगे, "मिडोरिकावा ने कहा। "और अपनी जिंदगी जिओगे। आपको इसे पूरी तरह से जीना जरूरी है। चाहे कभी कभी जिना एकदम बेकार लगे, यह जीवन जीने योग्य है। मैं इसकी गारंटी देता हूं। तो तुम सोच रहे होंगे कि, फिर मैं मौतकी बातें क्यों कर रहा हूँ? क्योंकि, जीवन में जो चीजें जेने लायक थी अब वो जैसे बोझ बन गई है, और मैं थक चुका हुँ। यह शायद अब मेरे बसकी बात नहीं है । तो, मैं एक शांत, अंधेरे जगह में घुस गया हूं बिल्ली की तरह, औऱ चुपचाप मौत का इंतजार कर रहा हूं। तुमको जितना ये बात जितनी निराशाजनक सुनाई पड़ती है उतनी बुरी नहीं है। यह तो हुई मेरी बात। तुम मुझसे बिलकुल अलग हो। तुम जीवनको संभालने में सक्षम हो। बड़ी जिम्मेदारी के साथ कुशलतापूर्वक अपने तर्क के धागे में उन चीजोंको पिरोना जो तुम्हारे जीने लायक हो। "

सुबह, उस वार्तालाप के दो दिन बाद, जब हाईदा कुछ काम कर रहा था, मिडोरिकावा ने सराय छोड़के जा रहा था। एक बैग अपने कंधे पर डालकर, वो पहाड़ी के नीचे तीन किलोमीटर की दूरी पर बस स्टॉप तक पहुंचा। हाईदाको कभी नहीं पता चला कि वह कहाँ गया था। मिडोरिकावा ने पिछले दिन अपने बिल का भुगतान किया और हाईदा से बिना कुछ बोले निकल गया। वह पीछे छोड़ गया कुछ रहस्य उपन्यासों का एक ढेर। इसके कुछ दिनों बाद, हाईदा भी टोक्यो लौट गया। और कॉलेज की पढाईमें लग गया।

Welcome to a place where words matter. On Medium, smart voices and original ideas take center stage - with no ads in sight. Watch
Follow all the topics you care about, and we’ll deliver the best stories for you to your homepage and inbox. Explore
Get unlimited access to the best stories on Medium — and support writers while you’re at it. Just $5/month. Upgrade