प्रेम और आँच ..

तुम्हारा प्रेम
अक्सर मेरे प्रेम को बौना
साबित कर देता है

ठीक उस दूध की तरह
जो तेज आँच में
उबल कर बर्तन से गिरते हुए
बर्तन को 
उसकी औकात बता देता है

दरअसल,
गलती उस दूध की नहीं
उस बर्तन की है
जिसका आयतन
उबलते दूध के उफान
की सीमा से 
से काफी कम होता है

गलती उस आँच की है
जो बार-बार दूध को
उबलने पर मजबूर कर देती है

दूध का तो स्वभाव होता है
ऊष्मा के संपर्क में आने पर स्वतः उबल जाना।

-अमन सिन्हा ‘अभि’