वास्तविकता

इन दिनों की बात है एक विषय अचानक मेरे जहन से आकर टकराया जिस कारण उसपर

सोचने के लिए मैं मजबूर हुआ | एक तरफ से यदि देखा जाये तो जिस विषय पर मैं लिख रहा हूँ इनका कोइ ख़ास महत्व नही दिखता लेकिन…..यदि हम इनकी गहराई में जाकर इन्हें समझने का प्रयाश करे तो इनकी महत्ता हमें समझ आने लगेगी |

ये कहानी जिनकी असलियत पर मैं सोचने का प्रयाश कर पाया….. इस कहानी की शुरुआत होती है हमारे LEARNING JOURNEY से जहाँ हम चार स्वयं सीखी (SELF-LEARNER) तमाम भौतिक सुख सुविधावों को त्यागकर , बेहतर LEARNINGS,वास्तविक जीवन,कैसे जिया जाए इसपर गहन अध्ययन कर जीने का प्रयाश कर रहे है |

जिस विषय पर मैं लखने जा रहा हूँ उस विषय पर मैं यदि सोच पाया हूँ …… तो उनका श्रेय हमारी TEEM की एक मित्र भारती को जाता है | जिनकी एक छोटी सी क्रियाकलाप ने मेरे नजरिये को बदलने का काम किया |

हुआ यूँ की जब हमारी टीम प्रथम दिवस जिस घर में ठहरे हुए थे वहां हमने रात्री का भोजन किया — -भोजन के पश्चात जो जुठे थाली बचे उन थालियों में से भारती ने स्वयं के थाली को धोने की इच्छा जताई || ऐसे में घर वालों ने मना किया कहा कि थाली हमें नहीं धोनी चाहिए हम मेहमान हैं किन्तु फिर भी भारती ने अपने थाली को धोया ||||

ये घटना देखने और सुनने में काफी आप सा लगता है — -पर…………………….यदि इनकी गहरी में जाकर सोचने का प्रयास करते है तो बहुत सारे तथ्य एवं सच्चाई निकलकर सामने आती है ||| दोस्तों — — -पूर्वजों से चली आ रही परम्पराएं ,धारणाए जिन्होंने हमारे समाज की महिलाओं और पुरुषों में कार्यों का वर्गिक्रीत कर दोनों को खंडित करके अलग करने का प्रयाश किया है | जिस कारण वर्तमान समय में इनका दुषपरिणाम देखने को मिल रहे हैं |

दोस्तों पुरुष प्रधान देश हमारे हिन्दुस्तान के ग्रामीण क्षेत्रों की यदि बात करू तो एक ख़ास बात पर आपने भी गौर किया होगा जब हम अपने घर पर भोजन करने बैठते हैं तब बहुत सारी नियम जो हमारे समाज ने महिलाओं के लिए बनाया कि — — — -घर के सभी पुरुषों के भोजन करने के पश्चात ही महिलाए भोजन कर सकती है ,,बर्तन महिलाओं को ही धोनी परेगी ,,पति के जूठे खाने को पत्नी को खानी चाहिए ,,पत्नी के जूठे खाने को पति को नहीं खानी चाहिए आदि-आदि|

इन सारी विषयों पर हमें गौर करने का फुरसत ही नही मिलता | महिलाऐं चाहे जिस भी स्थिती में हो बस हम पुरुष हर हालत में खुश रहना चाहते है |

इन सब विषयों पर जब मैंने गौर किया एक बहुत बरी LEARNING मिली की — — — — — — — ना जाने कहाँ से हमारे मन — मस्तिष्क ने महिलाओं के प्रती ऐसी धारणाओं को गोद (ADAPT) ले लिया जिसपर हम पुनर्विचार कर ही नहीं पाते …………….||||||||||

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