मेरा बेटा

“अंधेरा हो चला है। संध्या के समय आरती कर लेनी चाहिए। कहाँ खोयी हो कोकी!!”
सच मुच खो गयी थी। आशु के पापा की आवाज से जैसे तन्द्रा टूटी हो।
“आज आप ही कर दो । भगवान जी धन्य हो जायेंगे।” मैंने थोड़ा हँसते हुए कहा।
आशु के पापा ने अपने दोनों हाथों से मेरे कंधे पकड़ कर कहा ,”आप मुस्कुरा रही है!!! कुछ तो बात है, नहीं तो आपकी हंसी ईद का चाँद हो गयी थी। भगवान जी को थोडा इन्तजार करने दो, हमारी पर्सनल देवी की मुस्कान ने बहुत दिनों बाद दर्शन दिए हैं। “

वो जो एक झुर्री मुझे इनकी आँखो के पास दिखी थी वो अचानक से गायब हो गयी है। और आँखे चमक रही हैं।
ओह बहुत प्यारी मुस्कान है आशु के पापा की सच में।

अचानक मेरी नजर हाल के बीच में लगी फोटो पर चली गयी। फ़ोटोग्राफर के पास जा के खिंचवाई थी। क्या वक़्त था। फ़ोटो में लाल कलर का बैकग्राउंड है।
पहली फ़ोटो जिसमे हम चारों है। आशु के पापा दाई तरफ हैं और मेरे बच्चे बाई तरफ जहाँ उन्हें होना चाहिए। मेरे दिल के करीब। मेरा सर झुका हुआ है बाई ऒर पीशू की तरफ । छोटा बच्चे को ज्यादा प्यार मिलता है। बड़े बच्चे जल्दी समझदार हो जाते है।
क्या मुस्कराहट है सबकी। सबसे ज्यादा आशु के पापा की।
क्या ये फ़ोटो काफी नही दिखाने को कितनी जरुरी हूँ मैं तीनो की जिंदगी में।

कितना वक़्त गुजर गया है। अभी तो शादी होकर यहाँ आई थी। 32 साल हो गए है शादी को , आशु के पापा रिटायर होने वाले हैं। दोनों बच्चे कितने बड़े हो गए हैं।

लोग बहुत जलते होंगे आशु और पीशू मेरे दोनों बच्चे इंजीनियर हैं अपने पापा के जैसे। नौ महीने तकलीफ सह कर पैदा किया है और दोनों दिखते है बिल्कुल अपने पापा जैसे, उफ़्फ़। 
औरों की नजर से देखूँ तो खुद नजर लगा बैठू। फिर भी मै परेशान हूँ। 
अभी दीवाली की ही बात है।
परेशानी की वजह है पीशू का व्यवहार । 
पीशू को एक लड़की पसंद है। पहली बात तो वो लड़की बनिया है और हम लोग ब्राह्मण हैं। पीशू के पापा ब्राह्मण सभा के अध्यक्ष हैं। क्या कहेंगे लोग।
दूसरी बात की वो लड़की मुझे कतई पसंद नहीं।
ऊपर से उत्तरप्रदेश से, कतई नहीं।उस लड़की ने पता नही क्या जादू किया है। पीशू फोन नही करता आगे से। और इस बार हद हो गयी दीवाली पे भी नहीं आया।

बच्चों के बिना दीवाली कैसे होती हैं इन्हें क्या पता। जब इनके होंगे तब पता चलेगा। बहुत बेचैनी हो रही है। ऐसा लग रहा है मेरा एक बेटा मुझसे दूर जा रहा है। मै ऐसा नही होने दे सकती।
इस बार आशु घर आया है। मैंने बोल दिया है आशु को ,
मुझे पीशू के सभी दोस्तों से बात करनी है।
कुछ दोस्तों से बात भी की । बोल दीया सबको , समझाओ पीशू को।

अगर कोई ब्लड प्रेशर नाप लेता तो वो 160 प्लस था। लेकिन दीवाली की रात मेरे जीवन में नया उजाला आने वाला था। वो रात हमेशा याद रहेगी।मैं बहुत गुस्से में थी।
सिर दर्द से फट रहा था।
लाइट बंद थी । जब आप परेशान होते हो तो अँधेरा भाता है चाहे वो दीवाली ही क्यूँ न हो।
अचानक मैंने सर पर आशु के पापा का हाथ महसूस किया।
बहुत सर दर्द है क्या?
मेरे सब्र का बाँध टूट गया। आखों से आसुंओं का सैलाब निकलने लगा। सांस लेना मुश्किल होने लगा।
“पीशू ऐसा तो न था।” बड़ी मुश्किल से मेरे मुह से कुछ शब्द निकले।
“तुम भी तो ऐसी न थी कोकी!” आशु के पापा ने बहुत गंभीर मुद्रा में कहा।
“क्यूँ क्या किया मैंने!!” मैंने चिल्लाते हुए क्या।
“तुमने ऐसा सोचा भी कैसे की जिस बात को पीशू तुम्हारे कहने से नही मान रहा है अपने किसी भी xyz दोस्त के कहने से मान लेगा। क्या हमारी उसकी जिंदगी में इतनी भी जगह नहीं। थोडा सब्र करो कोकी। 
वो नाराज है तुमसे वरना क्या वो खुश होगा आज दीवाली के दिन भी ऑफिस में बैठकर। याद है पिछली दीवाली पर रंगोली बना रहा था। याद है तुम्हे।” आशु के पापा की आवाज सामान्य से थोड़ी ऊँची थी।

“उसका नाराज होना ऐसे ही है। क्या मुझे पता नही उसकी कितनी लड़किया दोस्त हैं। सब ऐसे ही जोश है। बस उससे मिलना जुलना छोड़ दे बस।” मैंने कहा।

“और ऐसा नही हुआ तो। क्या पता वो अपनी ज़िन्दगी में ठहराव चाहता हो। हो सकता है ना। “ उन्होंने पूछा।

“तो आप क्या चाहते हो। हां कर दूँ । मान लूँ उसकी बात। आशु की भी तो शादी करनी है। उसे देखो कितनी आसानी से मेरा कहना मान रहा है। “ , मुझे उनका टोकना बुरा लगा।

“कोकी!! मैं बस इसका हल चाहता हूँ। मेरे लिये इस दुनिया में तीन लोग जरूरी हैं। मै बस तुम तीनो को खुश देखना चाहता हूँ। एकसाथ। क्या तुमने महसूस किया की तुम्हारे इतना दुखी होने से मेरे दोनों बच्चों के रिश्तों पर क्या फर्क पड़ेगा। जब भी पीशू की बात होती है, आशु कभी उसका पक्ष नही लेता। मैं नहीं चाहता की आशु , पीशू को लेकर हमसे लड़े। लेकिन उनकी एक टीम होनी चाहिए। साथ देने की कोशिश होनी चाहिए। आशु बहुत समझदार है ,कोकी। मगर तुमसे बहुत प्यार भी करता है। परिवार का मतलब होता है साथ देना चाहे कुछ भी हो। दोनों खींचे खींचे रहते हैं।
जब हम नही होंगे उन दोनों को ही साथ रहना है ना।

मैंने तुम्हे बताया नहीं। पिछले हफ्ते चेक अप करवाया था। ब्लड प्रेशर ठीक नहीं है। शुगर लेवल भी बढ़ गया है।
ये सब मैं तुम्हें इसलिए नही बता रहा की तुम मेरी चिन्ता करो। मैं तुम्हें ये सब इसलिये बता रहा हूँ की मेरी उम्र बढ़ रही है मै पहले जैसे तुम्हारा ध्यान नही रख सकता।
क्या तुम मेरे लिए अपना ध्यान नही रख सकती।
तुम्हे पीशू के भविष्य की चिन्ता है इसलिये तुम टेंशन कर कर के नयी बीमारियाँ पाल रही हो।
तुम्हारी चिन्ता में मै भी स्वस्थ नही रह पा रहा।
हम दोनों की बिमारी से आशु और पीशू के रिश्तों में खटास आ जायेगी। 
मुझे डर है कहीं हमारे यूँ दुखी बीमार रहने का दोष आशु , पीशू को देने लगे। 
इस घर की जिम्मेदारी तुमसे अच्छा कोई समझ नही सकता पूरी जिंदगी लगा दी है तुमने इसे संभालने में।
इसलिए ये भी तुम सुलझा लोगी यकीन है मुझे।

मैं सिर्फ ये कहना चाहता हूँ कि मैं बहुत स्वार्थी हूँ। मुझे तुम्हारा साथ चाहिए क्योंकि मेरे बच्चे मेरे लिये दुनिया की सारी खुशियाँ ला देंगे, लेकिन वो ख़ुशी कोई ख़ुशी नही जिसे बाटने को तुम नहीं। तुम्हारी नाराजगी मैं संभाल नही सकता।
इसलिए तुम जो भी फैसला करोगी , उसका विरोध कम से कम मैं नहीं करूँगा।

रही उस लड़की की बात, मेरा ये मानना है कि जिन चीजों को वो बदल नही सकती अगर उन्ही बातों को दोहराते रहेंगे तो इस समस्या का कोई हल नहीं दीखता।
हमारे समाज में लोग धर्म बदल सकते हैं लेकिन जाती नहीं। 
रही बात सुंदर दिखने कि पीशू भी तो इतना गोरा नहीं लेकिन कोई मेरी और तुम्हारी नजर से देखे जरा। क्या वो श्यामवर्णी कान्हा से कम है।
पढाई लिखाई में वो लड़की किसी से कम नहीं , तो समझदार होगी इसमें भी कोई शक नहीं होगा।
तुम बस उसकी नीयत देखो। वो नेक होनी चाहिए।
तुम्हे लगता होगा की कैसे माँ बाप है उसके, इतना आसानी से मान गए।
मुझे लगता है कि बेटियों को पालने में ज्यादा प्यार और सावधानी चाहिए होती है शायद । इसलिये दिल से जुडी होती हैं।बेटी की आँख में आंसू कोई निस्ठुर पिता ही देख सकता है। 
वो मान गए हैं ये उनकी कोई कमजोरी नहीं है।
पहली बार जब पीशू ने हमें उस लड़की से मिलाया तो उसने झूठ कहा की वो उसकी दोस्त है सिर्फ।
सोचो जरा अगर कोई हमारे घर आके कहे की तुम्हारे बेटे ने हमसे उधार माँगा है मुझसे, क्या तुम मुकर जाओगी की हमारा कोई लेना देना नहीं।
वैसे ही पीशू जो वादे किसी से कर आया है उस से हम कैसे मुकर जाएं। वो भी तो घर का सदस्य है।

हो सकता है उस वक़्त वो भी उलझन में हो। झूठ बोला भी गया तो हमारे डर से, हमारे बेटे ने ही बोला।

पीशू की भी गलती है एक बार वो तुमसे बोलता कि
“माँ आपने अब तक सब मुझे बिना मांगे दिया है। मै चाहता हूँ की आप मेरी पसंद को अपना लें ख़ुशी से। आपकी सहमति के बिना कुछ नहीं होगा। आप बस एक बार बिना किसी पूर्वाग्रह और दुराग्रह के फिर से उसके बारे में सोचें। आप किसी लड़की के लिए इतना कर देंगी तो सोचिए क्या वो आपका अहसान भूल पायेगी। और अब आप मेरे लिए कोई और लड़की ढूंढेंगे और मैं उसको बिना पूरे मन के नही अपना पाया या इन सबसे निकलने मे मुझे वक़्त लग गया। तो ये उस लड़की के साथ भी अन्याय है।”

आशु और पीशू भी अपने जीवन में एक एक कोकी होने की इच्छा रखते हैं और ये गलत भी नहीं।

तुम सो जाओ अब दो बज गये हैं। चिंता मत करो , सब ठीक होगा। और याद रखो तुम्हारे दो बच्चे और एक अदद पति है जो तुम्हारे बिना कुछ नहीं। तुम हम तीनों की जिंदगी में सबसे पहली लड़की हो और हमेशा रहोगी।”

उस दिन मुझे सबसे अच्छी नींद आयी।

आज काफी दिन सोचने के बाद मैंने निश्चित किया है हम फिर से आगरा जा रहे हैं। बोल दिया है आशु के पापा को….. नहीं पीशू के पापा को। 
आखिर वो भी तो मेरा बेटा है।
वो लड़की वहीँ पास के शहर में रहती है।
जरा एक और बार देख लेती हूँ। ऐसा क्या है उस लड़की में।
बीच में जयपुर भी आता है । बहुत सुन्दर महल हैं वहाँ सुना है। मुझे महल भी देखने है , पिछले कुछ समय से रानी जैसा जो महसूस हो रहा है। 
(मन ही मन हँसते हुए)…..

लेखक:- इस कहानी का अंत चाहे कुछ भी हो शादी होती है या नहीं वो बहुत सारे परमुटेशन कॉम्बिनेशन पर आधारित है।
कहानी पीशू की माँ की है और वो आज खुश हैं सबसे पहले अपने पति के लिए। और सुना है खुश लोग लीक से हटकर फैसला ले लेते हैं कभी कभी।

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