तुम्हारे बिना

वो सुबह भी क्या सुबह होगी 
बिखरा बिस्तर होगा और ठंडी चाय होगी 
चाय का रंग तो होगा लेकिन वो खुशबु नहीं होगी 
तुम्हारे बिना वो सुबह भी क्या सुबह होगी ।

वो दिन भी क्या दिन होगा
रास्ते तो वही होंगे पर उन रास्तों पर वो मचलता दिल न होगा ।
पकवान तो लगे होंगे मगर उनमें वो स्वाद न होगा 
तुम्हारे बिना वो दिन भी क्या दिन होगा ।

शाम की हवाएं आंगन मे तो जरूर आएंगी
मगर उनमें वो समाचार ना होगा 
सुरज और लहरों की मुलाकात तो होगी 
मगर इस तड़पते दिल को चैन न होगा 
तुम्हारे बिना वो शाम भी क्या शाम होगी ।

रातें कटतीं रहेंगी 
और जिंदगी तो फिर भी जी लेंगे हम 
ना कोई बहार होगी ना कोई मुस्कान होगी 
सुरज की किरणें तो जरूर आएंगी 
मगर उनमें वो रौशनी ना होगी 
तुम्हारे बिना वो सुबह भी क्या सुबह होगी।।

तुम्हारे बिना .....