ग़लत मोड़
Jul 21, 2017 · 1 min read
चलो एक मोड़ ग़लत ले लें आज,
क्या पता क्या मिल जाए.
कहीं इतिहास से मुलाक़ात हो,
कहीं आया नहीं जो, वो कल दिख जाए.
रुकेंगे वहाँ शायद,
जहाँ से झरने बहते हैं.
कुछ आम, कुछ बेर तोड़कर,
चलो पेट भर लेते हैं.
नज़ारे बदलेंगे,
जब रात छाएगी.
चाँद को साथ ले चलेंगे,
जहाँ हम जाएँगे.
कुछ नया तो ले ही आएँगे,
क्यूँ ना कुछ पुराना छोड़ आयें.
चलो एक मोड़ ग़लत ले लें आज,
क्या पता क्या मिल जाए.
