सावधान ..किसी और का जीवन तो नहीं जी रहे हम !!!

“सपनो में सूपर्स्टार हम”

किताबें, कहानियाँ, सीरीयल्स, फ़िल्में और लोग। इनसे हर रोज हम पढ़ते हैं , प्रभावित होते और सिखते हैं

इनसे दो चार होने के दौरान कुछ पात्र तो इतने लुभावने लगते हैं कि बस उन्हें देखते ही तय हो जाय बस, अब तो यही बनना है और फिर लग जाते हैं .. ठीक वैसा बनने में जिस तरह वो अपनी दुनिया में है । हम करने लगते हैं वो सारे काम जो वो करता है ये भूल कर कि उसकी दुनियाँ और आपकी दुनियाँ में फ़र्क़ है ..

ऐसा भी होता है , हम शुरूवती दौर में चन्द ख़ुशनुमा पल कमा लेते हैं .. पर उसके बाद लगने लगता है ढेर असहनीय अकल्पनीय असफलताओ का..

रुको, ठहरो और जाँचो.. बताओ ख़ुद को कि तुम, तुम हो ना कि वो जिसकी तुम नक़ल कर रहे हो । तुम्हें पूरा हक़ है अपनी परिस्थिति के अनुसार ख़ुद को ढालने का .. कभी कभी रोने का दुखी होने का .. उन तमाम विषमताओ से गुज़रने का अवसर दो ख़ुद को .. क्यूँकि यही तैयार करेगी तुम्हें और मिलेगा हमें वर्तमान का योद्धा

शायद उससे कहीं बेहतर जिसे तुम अबतक जी रहे थे .. उनकी परिस्थितियों से सीखो न की हुबहू वैसा बनाने की !!!

वैसे भी डूप्लिकेट को कौन पूछता है भाई..इसलिए सावधान !!!

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