प्रयास
Sep 2, 2018 · 1 min read
चलो तुम कहते हो
तो कुछ देर के लिए ही सही
थोड़ा प्रयास करता हूँ ।
असहज हूँ,अस्पष्ट हूँ
यह अस्वीकार करता हूँ…
.
तुम कहते हो तो कोशिश करता हूँ
तुम्हारी महफ़िल में ढल जाने की…
कागज़ी ही सही मगर जज़्बातों से,
उस महफ़िल में जान लाने की।
तालियों से न सही तो गालियों से
एक मायावी पहचान पाने की।
.
प्रयास करता हूँ…
भनभनाती भीड़ की राह में
कुछ पल सुकून निकाल लूँ
बाकियों की तरह मैं भी
शीशे की दीवारों की चाह में
मनगढ़ंत जुनून पाल लूँ ।
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तुम ज़िद करते हो तो
तुम्हारी दुनिया में भी इम्तिहान देता हूँ
इस बुझदिल बागी किरदार को
अनिश्चित वक़्त तक मार देता हूँ…
परिणाम से तो परिचित हूँ,
फिर भी संदेह मिटाने को
तुम्हारी दुनिया में भी हार लेता हूँ
तुम्हारी दुनिया में भी हार लेता हूँ…

