फ़ासले
Sep 3, 2018 · 1 min read
फ़ासले क्या होते हैं?
जिन सड़कों की मील होते हैं,
उन्हीं पर चुभती कील होते हैं।
चलो मैं यह मानता हूँ
कि फ़ासले मजबूरी होते हैं
पर क्या तुम यह मानोगे
कि किनारों पर बिखरे पत्थर की तरह
फ़ासले भी ज़रूरी होते हैं?
जो ये पत्थर न रहें
तो लहरें थमेंगी नहीं
और बहा ले जाएंगी बेझिझक
अधूरे सपनों को
कुछ गैरों को, कुछ अपनों को।
शायद उसी तरह
जो न रहें ये फ़ासले
तो बह जाएंगे बेहिचक
मेरी बेचैनी के कुछ हिस्से
कुछ तुम्हारे ज़ख्म के,
कुछ मेरे इंतज़ार के किस्से…
नजदीकियों के साये में
दूरियों को क्यूँ भुला देते हो?
गौर से देखो तो फ़ासले भी कितने खास हैं,
हर भौतिक ख़ुशी से अलग एक एहसास हैं —
कि घटने पर इनके हम खुशनसीब होते हैं
और मिट जाने पर फ़िर से करीब होते हैं…
फ़ासले क्या होते हैं?
कभी सिलसिले तो कभी हौसले होते हैं,
फ़ासले तो फ़ासले होते हैं
फ़ासले तो फ़ासले होते हैं..

