नया साल करीब है

नया साल करीब है,
गरीब हुआ मेरा नसीब है।
मैं तो खुलकर हंस भी नहीं सकता, आजाद होकर उड़ भी नहीं सकता,
अपने मन की कर नहीं सकता, आठो पहर सिर्फ पढ़ नहीं सकता।
बस इतनी ही खता की, कि दुसरो की खुशियों की परवाह की।
मेरे दोस्तों ने भी गजब साजिश की, मनहुसियत लायी वो खुशियां क्षणभर की।
अब मन करे मेरा बार बार एक ही शोर,
नसीब पर चलता नही किसी का जोर।
मेरी जिंदगी की यही दास्तां है - करें कोई ओर, भरे कोई ओर।
फिर भी, दु:ख भरे दिल से, बंधी है हिम्मत की एक डोर।
जो कहती है-
खुदा का हाथ जिसके सिर पर हो, उसे किसी मुसीबत का क्या डर हो?
सुख दु:ख तो लगा ही रहता है जीवन में, उदास कभी ना उनसे हो।
वैसे भी, बिना मुश्किल के जीना भी कोई जीना है!
मेरा तो नाम ही यही कहता है-
हर परिस्थिति में मेरी विजय ही होना है।
कल की खुशियों के लिए, आज का ये पल हुआ गमगीन है;
क्योंकि,
नया साल करीब है,
सँवर जाएगा मेरा नसीब, मुझे यकीन है।