समय चक्र

वो भी एक पल था, ये भी एक पल है,
बीत गया एक कल और, आ रहा एक कल हैं।
हुकूमत में थीं जिंदगी, जिनसे की थी बंदगी,
पाने अपनी आजादी को, हमने भी फिर जंग की।
एहसास अब हो रहा, गुलामी तो दलदल हैं ।
बीत गया............ ।
हमसे सबकुछ छीन लिया, अपनों से भी अलग किया,
कर भरोसा हमने उन पर, स्वयं को आघात दिया।
बेफ्रिक होकर जीने को, मन में मची हलचल हैं।
बीत गया........... ।
बीती बातें हुयी पुरानी, नए दौर की नयी कहानी,
भूलाकर जुल्मों को सारे, करना हैं कुछ तूफानी।
बंजर भूमि पर पनप रही, ये पुष्पलता चंचल है।
बीत गया............ ।