मैं फिर जीत दिखलाऊंगा….

Vinod Kumar
Jul 27, 2017 · 1 min read

गिरकर मैं फिर खड़ा हो जाऊंगा,
हिम्मत से फिर राह बनाऊंगा,
मुक्कदर नहीं मेरा यूँ हार जाने मैं,
तू देख मैं फिर जीत दिखलाऊंगा,

क्या हुआ जो हूँ अकेला अभी,
समय आने पर मैं साथ तेरा भी पाऊँगा,
तू तोड़ता मुझे हर बार काँच के खिलौने की तरह,
मैं फिर काँच के टुकड़ों को जोड़ शीशमहल सजाऊंगा,
तू लाख छुपा मुझसे अपने आंसू आँख के रकीब,
मै हँसी में बदल आंसुओं को फिर बतलाऊंगा,

अभी जख्म हरा है तो क्या हुआ हमदम,
सब झेल कर भी मुश्किल मैं पार पाउँगा,
बरस ले बन तूफान मुझ पर तू कितना भी,
मैं हर बार की तरह फिर मुस्कराऊंगा…..

    Vinod Kumar

    Written by

    Engineer,social worker