संदेस

Photo by Salman Hossain Saif on Unsplash

हर घर जाओ
एक संदेस पहुचाओ

बता दो
नोटबंदी करके
कतार मे किसने
तुम्हे खड़ा किया था

कोन है जिसने
बेगुनाह सैनिको के
शहादत पे वोट
मांगा था

बता दो
धुप, बारिश
कड़कती ठंड मे
किसने किलो की
सेज सजाई थी

सात सौ किसानो को
मौत के घाट
किसने उतारा था

उस मंत्री का कौन
बना था संत्री
जिसने मासूमो पे
अपना रथ चलवाया था

बता दो
किसने छोड़ा तुम्हे
बेबस जब covid
घर पे दस्तक दे रहा था

कौन सरकार गिरा रहा था
कौन लाखो की भीड़ जुटा रहा था
ट्रम्प का नाम
डोलांड बता रहा था

बता दो
किसने कहा था
महज़ इक्कीस दिनों की बात है
कौन तुम्हे आत्मनिर्भर
का चूरन थमाकर
खुद चैन की नींद सोया था
भूके प्यासे मिलो चलने पर
किसने किया मजबूर तुम्हे

बता दो
सांसे जब
दम तोड़ रही थी
किसने गंगा में
लाशें बहायी थी
एक आँसू जो न रोया
जमीर जिसका कब का है खोया
रोज़ भेस बदलकर
कौन है जो
भक्तो के सपनो में आया

हर घर जाओ
सच्चाई बताओ

हर घर जाओ
एक संदेस पहुचाओ

please pardon any spelling mistakes

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No Matter What People Tell You, Words And Ideas Can Change The World.

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Maruti Naik

Maruti Naik

I write to remember. I write to remain honest. I write to leave a bread crumb trail for my daughter. I write to relax. Trying to impress my better half, I write

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