कभी धूप -कभी छाँव

जून २००९ में मैंने और रचना ने एक साथ गाया था ये गीत………बहुत मुश्किल आई थी…एक तो गाना आता नहीं था…रिकार्ड करना भी तभी सीखा था..हेडफ़ोन को हम दोनों नेबीच में पकड़ लिया था हाथ में ………और जैसे ही गाना शुरू करते हँसी भी शुरू………ऊपर से पल्लवी और निशी भी कम नहीं थे हँसाने को…पर वो सेर तो हम भी सवा सेर …..उन्हें कमरे से बाहर निकालकर ….कम से कम .२५-३० बार कोशिश की तब हो पाया था….. आजकल पुराने गीत ही सुन रही हूँ …उसी में मिला….याद ताजा कर गया………….आप भी सुने — -

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