For Me Love is Delhi
A poem
Nov 4 · 1 min read

कभी लिखते थे जिसके बारे मैं खुश होक़र
आज उस शहर का दिल है बेबस
कभी खुश थे जिसके बागों मैं
आज उस शहर से नज़र चुरा रहे है हम
फिर कभी मिलेंगे उससे फ़ुरसत मैं
ओर लिखेंगे एक नया नज्म
आज दिल्ली को दूर से ही सलाम
पर दिल्ली अभी भी ख़ास


