मख़दूम मुकर्रम क़ाज़ी अब्दुल जमील के नाम
क़िब्ला मुझे क्यों शरमिंदा किया मैं इस सना और दुआ के क़ाबिल नहीं मगर अच्छों का शेवा है बुरों को अच्छा कहना इस मदह गुस्तरी के एवज़ में आदाब बजा लाता हूँ
क़िब्ला मुझे क्यों शरमिंदा किया मैं इस सना और दुआ के क़ाबिल नहीं मगर अच्छों का शेवा है बुरों को अच्छा कहना इस मदह गुस्तरी के एवज़ में आदाब बजा लाता हूँ