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What are pre-determined factors of mental health issues after the marriage?

what are the pre-determined factors of mental health issues after the Marriage?

शादी का प्यारा सा स्वप्न लिए घुमती थी वो अंगना में पढ़ती थी इस खुशी में कि एक दिन शादी कर अपने घर में जाऊंगी सोचती थी दिन रात वो होगा मेरा आलीशान बंगला और सपनों सा राजकुमार आएगा वो घोड़ी लेकर मुझे लेने करूंगी मैं सोलह श्रंगार,

और एक दिन ऐसा ही हुआ उसकी हो गई अंगना से विदाई गयी वो खुशी खुशी अपने घर में बनी किसी की पत्नी किसी की भाभी आंखों में थे उसके हजार सपने हुआ बस एक सच सपना क्योंकि जो सोचा था वो न मिला क्योंकि शादी के बाद प्रत्येक महिलाओं को अनेक समस्याओं का सामना करना होता है और जिसके बारे में वह अपने पति से कहने में शर्माती है आस पास के महिलाएं उसे घृणित नजरों से देखती है और वह तनाव और डिप्रेशन का शिकार हो जाती है,

क्योंकि हमारा समाज पितृसत्तात्मक समाज है जहां पुरूष को हमेशा से ऊंचा दर्जा प्रदान है उनके स्वास्थ्य पर अधिक ख़र्चा किया जाता था और शादी के बाद महिला का कर्तव्य परिवार की सेवा और उनको खुश करना होता है घर को संभालना और बच्चे की परिवरिश करना उसके अलावा उनकी हर इच्छा को दबा दिया जाता है क्योंकि समाज में महिलाओं के प्रति जागरूकता की कमी है उनको हमेशा घृणित नजरों से देखा जाता है जिस कारण उन्हे शादी के बाद अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है

अतः अब यह जानना अति आवश्यक है कि शादी के बाद महिलाओं में मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों के कुछ स्रोत क्या है जैसे सबसे आम कारण जो महिला के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है क्योंकि स्त्री का स्वभाव बहुत कोमल होता है और थोड़ी सी परेशानी उनके स्वास्थ्य पर अत्यधिक प्रभाव डालती है और जिसके कारण उन्हें डिप्रेशन जैसी मानसिक बीमारी हो सकती है जिसमें प्रमुख -

1.• मासिक धर्म, गर्भावस्था या प्रसव के कारण हार्मोनल परिवर्तन -

अधिकांशतः महिलाएं मासिक धर्म के दौरान हार्मोनल

परिवर्तन से प्रभावित होती हैं जिसकी वजह से उनके मनोदशा और व्यवहार में बदलाव आते हैं और यह विशेष रूप से तब और मुश्किल हो जाते है जब वह परिवार से अलग होती हैं साथ ही गर्भावस्था और प्रसव के दौरान हार्मोनल परिवर्तन भी होते हैं और बिशेषज्ञो का मानना है कि 7 में से लगभग 1 महिला प्रसव के बाद अवसाद

से पीडित होती है और ज्यादातर मामलों में वित्तीय समस्याओं के चलते या फिर बेटे के बजाय बेटी का

जन्म प्रमुख कारण होता है जो उनके मस्तिष्क पर अत्यधिक प्रभाव डालता है,

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  1. जीवनसाथी द्वारा किया गया दुर्व्यवहार -

भारत में अधिकतर महिलाएं आमतौर पर जीवनसाथी के

अत्याचारो के खिलाफ आवाज़ नहीं उठाती हैं क्योंकि उन्हें

अक्सर इस बात का डर सताता है कि ‘समाज क्या

कहेगा’ और जिस कारण वे अपने परिवार से सच्चाई छिपाती हैं क्योंकि वे अपनी जिंदगी अस्त-व्यस्त नहीं करना

चाहतीं और यह उन्हें उस भावनात्मक सहयोग से वंचित

करता है, जिसकी वे हकदार हैं यह भी एक महत्वपूर्ण कारण है जिसका सीधा असर उनके स्वास्थ्य पर दिखाई देता है,

3• कार्यालय में भेदभाव की भावना -

आज अधिकांश महिलाएं शादी के बाद भी जॉब करती है और एक समान नौकरी के बाद भी उनके कार्यभार के लिए आम तौर पर महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले कम वेतन मिलता है अपनी नौकरी खोने के डर से अक्सर वे• चुपचाप यौन शोषण सहती हैं जो उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डालता है,

4• • आत्मसम्मान में कमी और परिवार का समर्थन

नहीं मिलना -

हालांकि यह समस्या आम है क्योंकि महिलाओं को जन्म से ही सहनशील होना सिखाते हैं और उन्हें यह महसूस कराया जाता है कि दुख के साथ रहना सीखो और सहारे की कमी के चलते उनके आत्मसम्मान में कमी आती है, जिससे

अवसाद हो सकता है,

परिणामस्वरूप थकावट, कुपोषण तथा गर्भावस्था में देखभाल की कमी के कारण महिलाओं के साथ साथ

उनके बच्चों पर ख़राब स्वास्थ्य का खतरा बढ़ जाता है,

  1. क़ानूनी अधिकारों तथा निर्णय लेने की शक्ति की कमी -

हमारे समाज मे महिला को सम्पति रखने, उतराधिकार में पाने, पैसा कमाने या पैसा उधार पर लेने का अधिकार नहीं है यदि वह अपनी शादी से खुश नहीं और वह तलाक लेना चाहें तो उसे अपनी चीजों या अपने बच्चों के पास रखने की अनुमति भी नहीं है जिस कारण वह अधिक चिंतित रहती है

हालांकि उसे कानूनी अधिकार प्राप्त भी है तो उसके समुदाय की परम्परायें स्वयं के जीवन पर नियंत्रण नहीं करने देती उसे दूसरो के हिसाब से जीना होता है और

तथा स्वयं महिला यह निर्धारित नहीं कर सकती है कि परिवार का पैसा किस प्रकार से खर्च किया जाए अथवा कब चिकित्सा सेवा प्राप्त की जाएं और तो और वह अपने पति या सास-ससुर की अनुमति के बिना वह घर से बाहर नहीं जा सकती न समाज के निर्णयों में भाग ले सकती तथा जब महिलाओं को हर सुविधा से वंचित रखा जाता है तो उन्हें जीवित रहने के लिए पुरुषों पर आश्रित होना पड़ता है,

जिस कारण वे उन सब चीजों की मांग आसानी से नहीं कर पाती जो उनके अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक होती है, जैसे कि अच्छा व पर्याप्त भोजन, परिवारनियोजन, सुरक्षति यौन संबंध तथा हिंसा से मुक्ति इत्यादि,

और रोटी, कपड़ा मकान व अनुमति जैसे मूलभूत चीजों के लिए पति व परिवार पर निर्भरता के कारण वह गुलाम बन जाती है तथा अपने निहित सामर्थ्य की पूर्ति नहीं कर पाती हैं और दिन प्रतिदिन वह तनाव से ग्रसित रहती है और उनके स्वास्थ्य पर अत्यधिक दुष्प्रभाव पड़ता है,

6.अधिक बच्चों का या कम बच्चों का होना -

अधिकांश महिलाओं के साथ हो रहे भेदभाव के कारण उन्हें जल्दी-जल्दी गर्भवती होना पडता है क्योंकि केवल बच्चे पैदा करना और परिवार का ध्यान रखना ही उनका कर्तव्य है चाहे कैसी भी परिस्थिति हो और इन सब परिस्थितियों में महिलाएं ख़राब स्वास्थ्य वाला जीवन

बिताती है और उन्हें स्वास्थ्य सेवाएं भी कम उपलब्ध होती है और वे अपने इस निम्न स्तर को अपनी नियति मानकर स्वीकार कर लेती हैं क्योंकि उन्हें शुरू से ही पुरुषों से हीन होने का पाठ पढाते है वे अपने ख़राब स्वास्थ्य के साथ सामंजस्य कर लेती है तथा चिकित्सिक सहायता तब जब स्वास्थ्य समस्याएं गंभीर या जानलेवा बन जाती है,

  1. कभी कभी गरीबी ऐसे रिश्ते बनाने के लिए महिलाओं को मजबूर कर देती है जिसमें उन्हे जीवित रहने के लिए उन्हें पुरुषों पर निर्भर रहना होता है या ऐसे कुछ कार्य करने पड़ते हैं जो उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं — उदहारणतया वह निर्मुख रूप से पारिवारिक हिंसा से पीड़ित रह सकती है या फिर असुरक्षित यौन संबंधों को नहीं कह सकती क्योंकि आर्थिक सहारे तथा सामाजिक स्वीकृति खोने का भय रहता है जिस कारण वह मानसिक तनाव का शिकार हो सकती है,

8.महिलाओं का समाज में निम्न स्तर

हमारे समाज में महिला का स्तर पुरुषों की अपेक्षा कम हैं और सामाजिक तथा सांस्कृतिक प्रथाएं निम्न स्तर को और अधिक प्रगाढ़ बनाती हैं जिस कारण भेद-भाव को बढ़ावा मिलता है और उनके साथ ख़राब व्यवहार किया जाता है या

उन्हें प्रत्येक चीज से वंचित रखा जाता है क्योंकि वे महिलायें हैं इस भेद-भाव का दुस्प्रभाव हमेशा ही महिला के स्वास्थ्य पर पड़ता है,

साथ ही सबसे महत्वपूर्ण और आम कारण गरीबी है क्योंकि गरीबी के कारण उन्हे ऐसी परिस्थिति में रहने के लिए विवश होना पड़ता है जिनके कारण उन्हें अनके शारीरिक तथा मानसिक समस्यायें हो सकती हैं उदहारणतया गरीब महिलाएं अकसर अत्यंत ख़राब आवास में रहती है जहाँ स्वच्छता या स्वच्छ जल उपलब्ध नहीं होता और वह

पर्याप्त व अच्छे भोजन से भी वंचित है और उन्हें काफी

कीमती समय व शक्ति ऐसा भोजन ढूंढने में लगानी पड़ती है

जिसे वह वहन कर सकती हैं

और कभी कभी वह ऐसा कार्य करने के लिए विवश हो जाती है जो खतरनाक होते हैं या फिर जिनमें अधिक समय तक कार्य करना पड़ता है और तो और कभी कभी यौन उत्पीड़न की शिकार भी होती है और कभी कभी उनकी भारी कार्य करने के लिए दैनिक वेतन भोगी की तरह नियुक्त की जाती है परन्तु इस प्रकार के कार्य करने के लिए आवश्यक अधिक शक्ति उन्हें नहीं मिलती है

•और तो और स्वास्थ्य सेवाओं के उपलब्ध होने के बावजूद भी उन तक पहुंच नहीं पाती हैं और जीवित रहने के संघर्ष में इतनी व्यस्त हो जाती हैं की उन्हें न तो समय मिलता है और न ही उनमे इतनी शक्ति बचती है कि वे अपने स्वयं की आवश्यकताओं की पूर्ति की ओर ध्यान दे और अपने भविष्य की योजनायें बनाए नई नई दक्षताएं हासिल करें या

अपने बच्चों को बेहतर देखभाल करने की ओर ध्यान दें और उन्हें अक्सर मजबूर कर दिया जाता है कि वे इंधन, चारा तथा पानी जैसी वस्तुओं का परिवार के जीवित रहने के लिए प्रबन्ध करे तथा खेतों पर काम करें जिसके लिए उन्हे न कोई पैसा मिलाता है और न कोई श्रेय,

अतः शादी के बाद बिशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है जिस कारण वह सदैव तनावग्रस्त और उनका स्वास्थ्य खराब रहता है।

by ichhori.com Reference: ichhori.com

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