मेरे अरमानों का पौधा

स्रोत— स्टैक छवियाँ

स्वछंद, निर्लज्ज, आह्लादित और प्रफुल्ल,
बेचैन , संकुचित , भयभीत और व्याकुल,
भटक रहा अपने ही घर में,
मेरे अरमानों का एक पौधा|

मैं कैसे भूलूं प्रथम बसंत,
मेरे आँगन में थे रंग बहुत,
सतरंगी मां के आँचल जैसा
दिशाहीन और आनंदित हर पल,
मेरे बचपन के सपनों का छौंका
मेरे अरमानों का एक पौधा|

ज़िन्दगी की दौड़ में,
मैंने उसको खून से सींचा,
जब जब पड़ी गर्मी संकट की,
उसने अपनी छांव में खींचा,
नंगे पावों के छालों जैसा,
मद मस्त युवा सपनों के जैसा,
मेरे अरमानों का एक पौधा|

था सूर्य प्रगाढ़ उस गर्मी में,
थे वृक्ष अनेक उस परिधि में,
फिर भी एकांत भयानक था,
अपनी शाखाओं के आलिंगन में,
अपनी आहट से घबराता 
मेरे अरमानों का एक पौधा|

है मृत्यु अटल ये जनता हूँ,
है माटी सत्य आधार मेरा,
रेगिस्तान में दरिया जैसा,
छुई मुई की कुम्लाहट जैसा,
मेरे अरमानों का एक पौधा|

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