राम राम जी

बहुत जरूरी होता है खुद की भावनाओ को समझना, और बिना किसी को ठेस पहुचांये उसको सही माध्यम देना। क्योंकि यह अंदर ही अंदर घुटने से विष का रूप ले लेती है।जितना जरूरी है इस अंदरुनी एहसास को महसूस करना उतना ही जरूरी है उन्हें सही तरीके से बाहर निकालना।

वरना न जाने कितनी अनकही बातें साथ ले जायेंगे... लोग झूठ कहते हैं कि, खाली हाथ आए थे, खाली हाथ जाएगें....

मेरी गलतियां, मेरी कमियां, मेरे सारे दोष, माफ कर देना 🙏🏼प्रभु 🙏🏼 क्यों की मैं जिस माहौल में रहती हूं, उसे दुनिया कहते हैं.......

एक प्यारा सा आप सभी से रिश्ता बना है, कुछ मेरा है, कुछ तेरा है, कहीं लिखा नही, कहीं पढ़ा नही, कहीं देखा नही, कहीं सुना नही, फिर भी जाना पहचाना है, कुछ मेरा है, कुछ तेरा है..

मेरा लिखना कभी मुकम्मल नहीं होगा... ..

गर आप सभी इतनी हसरतों से हमें नहीं पढ़ोगे...!

आप सभी की आभारी हूँ।

सविता