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Pexels- Janko Ferlic

Hindi Poem: अंतिम छाया दूँगा तुमको

अंतिम छाया दूँगा तुमको
आ जाओ बैठो संग मेरे
झड़ते हैं पत्ते बारिश से
दो क्षण रुक मिल जाओ मुझसे
हल्की होती ये शाखे हैं
पर भारी सा जी लगता है
देखूँगा जाने कब तुमको
बाँहों का डालूँगा घेरा
कुछ दिन में बर्फ़ पड़ेगी जब
सो जायेगा ये चित मेरा

नित दिन देखा सोते तुमको
चादर पर मेरी छाँव तले
फिर घुटने घुटने, और पैरों पर,
फिर माँ से अपनी ज़िद करते,
की शाख़ों से चुनकर पत्ते
बीनोगे गोल और लम्बे लम्बे
सहेजोगे उनको अपनी
नन्ही सी कोमल मुट्ठी में

आओ फिर से छूकर देखो
इन रंग बिरंगे पत्तों को
ये तेज़ हवा में उड़ते हैं
पर देखें राह तुम्हारी हैं
आकर इनको फिर से चुन लो
आलिंगन में भर लूँ तुमको
प्यारे अनुभव मीठे संग के
ले जाऊँ अपने अंतर्मन में

मिलूँगा फिर अगले बसंत
आऊँगा ये ही छवी लिये
क्या तुम भी मुझको सोचोगे
जितना सोचूँगा मैं तुमको ?
क्या नन्ही रंगीन किताबों में
पाऊँगा मैं अपने पत्ते?

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Antim chhaaya duunga tumko

Aa jao baitho sang merey

Jhadtey hain pattey baarish se

Do kshan ruk mil jao mujhse

Halki hoti ye shaakheiN hain

Par bhari sa ji lagta hai

Dekhunga jaaney kab tumko

BahoN ka daluunga ghera

Kuch din mein barf padeygi jab

So jayega ye chit mera

Nit din dekha sotay tumko

Chader per meri chhaanw taley

Phir ghutnoN ghutnoN,aur pairoN per, phir maa se apni zid kartey

Ki shaakhoN se chun ke pattey beenogay gol aur lambey waley

sahejogay unko apni nanhiN si komal muthhi mein

Aao phir se chhu kar dekho in rang birangey pattoN ko

Ye tez hawa mein udtay hain per dekheiN raah tumhari hain

Aa kar inko phir se chun lo

Main aalingan mein bhar luuN tumko

Pyarey anubhav meethay sang ke le jauun apney antarman mein

Miluunga phir agley basant aaunga.

Ye hi chavi liye

Kya tum bhi mujhko sochogay jitna main sochuunga. tumko?

Kyaa nanhi rangeen kitaaboN mein pauunga main apney pattey??

my tukbandi

हम स्वर्णिम पन्नों पर लिखा नहीं करते, हम लिखकर पन्नों को…

Namrita Swarup ( गुलनाज़ )

Written by

ख़याल मन को घेरते हैं या मन ख़यालों को? जवाब जो भी हो, ख़यालों को अगर लिख लिया जाए तो पढ़ने में बड़ा मज़ा आता है, आपका क्या ख्याल है? बताइयेगा :)

my tukbandi

हम स्वर्णिम पन्नों पर लिखा नहीं करते, हम लिखकर पन्नों को स्वर्णिम बना दिया करते हैं।

Namrita Swarup ( गुलनाज़ )

Written by

ख़याल मन को घेरते हैं या मन ख़यालों को? जवाब जो भी हो, ख़यालों को अगर लिख लिया जाए तो पढ़ने में बड़ा मज़ा आता है, आपका क्या ख्याल है? बताइयेगा :)

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