Hindi Poem: चन्दन और चिनार

Ritu Chaudhry
Jan 18, 2018 · 1 min read

मिल तो लो

वाकिफ़ करवाउंगी

उस रौशनी से

जिसे मैं भी महरूम थी

अब तलक,

शायद तुम भी .

मंदिर में दीपक मान

वहीं छोड़ आये;

उस दीपक ने आग

लगा दी तुम्हारे मंदिर में.

सब कुछ जला ;

बस मैं ही महफूज़

रह गई ,

उस आग से.

दीवारें डह गईं ,

बुत राख हो गए ,

चिनार ख़ाक हो गए ,

चन्दन और चिनार ,

खुशबू फैली चारों ओर.

इससे पहले बस्ती जले

सब को पता चले

आओ बरस जाओ.

my tukbandi

हम स्वर्णिम पन्नों पर लिखा नहीं करते, हम लिखकर पन्नों को स्वर्णिम बना दिया करते हैं।

Ritu Chaudhry

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Just this. Not much.

my tukbandi

हम स्वर्णिम पन्नों पर लिखा नहीं करते, हम लिखकर पन्नों को स्वर्णिम बना दिया करते हैं।