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Hindi Poem: चन्दन और चिनार

मिल तो लो

वाकिफ़ करवाउंगी

उस रौशनी से

जिसे मैं भी महरूम थी

अब तलक,

शायद तुम भी .

मंदिर में दीपक मान

वहीं छोड़ आये;

उस दीपक ने आग

लगा दी तुम्हारे मंदिर में.

सब कुछ जला ;

बस मैं ही महफूज़

रह गई ,

उस आग से.

दीवारें डह गईं ,

बुत राख हो गए ,

चिनार ख़ाक हो गए ,

चन्दन और चिनार ,

खुशबू फैली चारों ओर.

इससे पहले बस्ती जले

सब को पता चले

आओ बरस जाओ.

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हम स्वर्णिम पन्नों पर लिखा नहीं करते, हम लिखकर पन्नों को स्वर्णिम बना दिया करते हैं।

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