पहचानें झूठी है

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पहचानें झूठी है

वादे टूटे हैं

जिंदगी रूठी है

शाम भी घायल है

रात भी रोती है

हुआ है क्या सबको

सुबह भी सोती है

पहचानें झूठी है ।।

अँधेरा कायम है

कलरव गायब है

रास्ते सूने हैं

जग भी खोया हैं

इन्ही पहचानों में

भटकता जाता हैं

इन्ही पहचानों से

उन्हें बतलाना हैं

पहचानें झूठी हैं ।।