Raghvendra Pandey

पहचानें झूठी है

Picture Credit : www.pexels.com

पहचानें झूठी है

वादे टूटे हैं

जिंदगी रूठी है

शाम भी घायल है

रात भी रोती है

हुआ है क्या सबको

सुबह भी सोती है

पहचानें झूठी है ।।

अँधेरा कायम है

कलरव गायब है

रास्ते सूने हैं

जग भी खोया हैं

इन्ही पहचानों में

भटकता जाता हैं

इन्ही पहचानों से

उन्हें बतलाना हैं

पहचानें झूठी हैं ।।

my tukbandi

हम स्वर्णिम पन्नों पर लिखा नहीं करते, हम लिखकर पन्नों को स्वर्णिम बना दिया करते हैं।

Raghvendra Pandey

Written by

Interested In Poetry, Politics, History, Religion, Philosophy, Statistics and Data Science.

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