Pic by Alvin Decena (Pexels)

सब सोये हैं…


कल मेरी गली में तमाम कोहरा था

आधे पेट अधमरे से कुछ शरीरों को जैसे ठेलता था

उसे फुसफुसाते हुये सुना था,

ले जायेगा उन्हें जहाँ छत होगी, बिस्तर होगा, खाना इफ़रात में होगा

कोशिश जारी थी उसकी मगर गाड़ियों की तेज़ रोशनी से कोहरा टकरा गया और उठ गया

अब कौन ठेलेगा इन्हें?

बाक़ी सब सोए हैं मेरी गली में…

my tukbandi

हम स्वर्णिम पन्नों पर लिखा नहीं करते, हम लिखकर पन्नों को स्वर्णिम बना दिया करते हैं।

Namrita Swarup ( गुलनाज़ )

Written by

ख़याल मन को घेरते हैं या मन ख़यालों को? जवाब जो भी हो, ख़यालों को अगर लिख लिया जाए तो पढ़ने में बड़ा मज़ा आता है, आपका क्या ख्याल है? बताइयेगा :)

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हम स्वर्णिम पन्नों पर लिखा नहीं करते, हम लिखकर पन्नों को स्वर्णिम बना दिया करते हैं।