Celebrate This Valentine’s Week With Hindi Love Poems

इस वेलेंटाइन सप्ताह को हिंदी प्रेम-कविताओं के साथ मनाएं


जैसा कि सभी को ज्ञात होना चाहिए (क्यों कि ये एक सामान्य ज्ञान की बात है), प्रेम-सप्ताह प्रारम्भ होने को है. और प्रारंभ होने को है प्रतीक्षाएं, प्रेरणाएं, पीड़ाएं, आहटें, दस्तकें, रौनकें, मिलन, आलिंगन, बिछुड़न, चुम्बन, ज्वालाएं, राहतें इत्यादि इत्यादि, क्योंकि ये सब प्रेम ही के अभिन्न अंग है. और ये सब साहित्य का भी अहम हिस्सा है. प्रेम भी तो सीधा साहित्य से जुड़ा है. हालांकि प्रेम सीधा सामाजिक व्यवस्था से भी जुड़ा है, और साहित्य भी तो समाज में घुला-मिला है. कुल मिलाकर बात ये है कि प्रेम, साहित्य और समाज का एक अद्भुत तालमेल है जो प्रेम-पंछियों को सिखाता है विभिन्न प्रकार (प्रतीक्षाएं, प्रेरणाएं, पीड़ाएं…) की भावनाओं के साथ तथाकथित आग के दरिया में गोते लगाना.

अतः सभी प्रेमियों एवं प्रेम में पड़ने की चाह रखने वालों को ये प्रेम-उत्सव मुबारक हो. खास तौर से प्रेम में पड़ने की चाह रखने वालों के लिए ये उत्सव महत्वपूर्ण है, क्योंकि यही एक सप्ताह का समय है जो उन्हें इस बात से अवगत करवाता है कि वो तो पहले से ही उसके इश्क़ की गिरफ्त में है जिसकी मोहब्बतों को वो अपनी जिन्दगी में शामिल करना चाहता है. अरे रे रे… ये मैं क्या कह गया जो मुझे खुद को समझ नहीं आया. यही तो प्रेम है. और इसी बात पर अर्ज करता हूं अपना एक शेर, मुलाहिजा फरमाएं…

मोहब्बत से बढ़कर मर्ज़ ही क्या है,
मगर राजू! आजमाने में हर्ज़ ही क्या है.

तो भैया बात ऐसी है, बस लग जाओ आजमाइशों के इस दिलचस्प खेल में. यहाँ पर मैं उन मित्रों से माफ़ी चाहूँगा जो प्यार को खेल समझने के खिलाफ़ है. अरे भाई मैं भी इसकी खिलाफ़त करता हूं मगर यहाँ खेल से मेरा नकारात्मक आशय नहीं था. मेरा मतलब क्रीड़ा से है… प्रेम-क्रीड़ा! (देखा… सुनने में कितना मदिर लगता है ये शब्द.)

अब एक बात पर गौर कीजिए कि अपने इस लेख का शीर्षक क्या है? इस वेलेंटाइन सप्ताह को हिंदी प्रेम-कविताओं के साथ मनाएं. जी हां… यहां मैं प्रस्तुत करने वाला हूं मेरी कुछ हिंदी प्रेम-कविताएं, जो शायद आपके कुछ काम आ जाए इस बार के वैलेंटाइन-सप्ताह को खूबसूरत बनाने में. पढ़िए, पढ़ाइए और प्यार बाँटिए…



हां तो जनाब कैसा लगा आपको ये हिंदी कविताओं में लिपटा हुआ प्यार? कौनसी कविता अथवा शेर आप अपने महबूब को समर्पित करना चाहेंगे, नीचे टिप्पणी अनुभाग में जरूर बताइएगा. ज्यादा अच्छा होगा अगर आप अपना कोई छोटा सा किस्सा अथवा कविता यहाँ पर साझा करें. और अगर आप हमारे प्रकाशन से लेखक के रूप में जुड़ना चाहते हैं तो आपका तहेदिल से स्वागत है-


उम्मीद करते हैं आप ये खूबसूरत कविताएं अपने सनम के साथ मिलकर पढेंगे और अपनी कविताएं भी हमारे साथ साझा करेंगे. धन्यवाद. नमस्ते.

my tukbandi

हम स्वर्णिम पन्नों पर लिखा नहीं करते, हम लिखकर पन्नों को स्वर्णिम बना दिया करते हैं।

Rajendra Nehra

Written by

The author of 'My Tukbandi'

my tukbandi

हम स्वर्णिम पन्नों पर लिखा नहीं करते, हम लिखकर पन्नों को स्वर्णिम बना दिया करते हैं।