Ved Vigyan Mandir(Vaidic And Modern Physics Research Center)

आपको सहर्ष सूचित किया जाता है कि पूज्य आचार्य अग्निव्रत जी नैष्ठिक वेद विज्ञान अनुसंधान के जिस महान् कार्य में विगत लगभग बारह वर्षों से तपस्यारत थे, वह अब पूर्ण होने जा रहा है। वेद की ईश्वरीयता एवं सर्वविज्ञानमयता को सिद्ध करके वेद व ऋषियों के महान् ज्ञान-विज्ञान के साथ-2 भारतवर्ष की विश्व में प्रतिष्ठा हेतु किया गया ऋग्वेद के ब्राह्मण ऐतरेय ब्राह्मण का वैज्ञानिक व्याख्यानका कार्य पूर्ण हो चुका है। दिनांक 26.03.2017 को इस ग्रन्थ का लगभग 75% भाग Copy right हो चुका है। शेष भाग के Copy right की प्रक्रिया भी जारी है। सम्भवतः 15 मई 2017 तक वह प्रक्रिया भी पूर्ण हो जाएगी। इसके पश्चात् ग्रन्थ के प्रकाशन का महत्तर कार्य करना है।

महानुभाव! आपने आचार्य जी की प्रतिभा पर विश्वास करके पिछले 12 वर्ष तक निष्काम भावना से अपना उदार आर्थिक सहयोग प्रदान किया है। इस सहयोग का फल ही यह ग्रन्थ है, जिसका नाम ‘वेदविज्ञान-आलोकः’ है। यह ग्रन्थ सम्पूर्ण विश्व की एक महती वैज्ञानिक धरोहर है। हमारा विश्वास है कि इस ग्रन्थ के आधार पर विश्व के Theoretical Physicist एक सदी तक अनुसंधान कर सकेंगे। यह कार्य विश्व की एक आश्चर्यजनक घटना होगी कि धार्मिक समझे जाने वाले किसी ग्रन्थ की व्याख्या सम्पूर्ण विश्व के भौतिक विज्ञान को एक क्रान्तिकारी दिशा देगी। आचार्य जी की इस तपस्या में आप व हम सब भागीदार हैं, जिन्होंने उन्हें आर्थिक निश्चिन्तता प्रदान की है।

महानुभाव! अब इस लगभग 3000पृष्ठीय ग्रन्थ के प्रकाशन का भार हम सब पर हैं। इसकी 1000 प्रतियों के प्रकाशन में लगभग 35 लाख रुपये का व्यय होने का अनुमान है। यह ग्रन्थ बहुरंगी चित्रों से सज्जित एक अद्भुत् ग्रन्थ होगा। इस ग्रन्थ के साथ आचार्य जी का कुछ लघु परन्तु महत्वपूर्ण साहित्य भी प्रकाशित करने की योजना है, जिस पर लगभग 5 लाख व्यय होने का अनुमान है।

इस प्रकार कुल 40 लाख रुपयों की आवश्यकता है। आपसे निवेदन है कि इस ऐतिहासिक, वैज्ञानिक व वैदिक महायज्ञ में अपनी श्रद्धा व सामर्थ्य के अनुसार यथाशीघ्र अधिकाधिक आहुति प्रदान करके पुण्य के भागी बनें। आशा है कि आप स्वयं तथा अपने मित्रजनों को इस अभियान में भागीदार बनाऐंगे।

आशा के साथटी. सी. डामोर (से. नि. V.L. , से. नि. I.G. पुलिस)

मंत्री, श्री वैदिक स्वस्ति पन्था न्यास

  • आधुनिक सैद्धान्तिक भौतिकी (Theoretical physics) की विभिन्न गम्भीर समस्याओें विशेषकरCosmology, Astrophysics, Quantum field theory, Plasma physics, Particle physics एवं String theory से सम्बन्धित अनेक वास्तविक समस्याओं का आश्चर्यजनक समाधान इस ग्रन्थ के गहन अध्ययन से सम्भव है। इसके साथ ही इन क्षेत्रों में नये-2 अनुसंधान करने के लिए आगामी लगभग 50 वर्ष के लिए पर्याप्त सामग्री इस ग्रन्थ में विद्यमान है।
  • इस ग्रन्थ से विकसित थ्योरिटीकल वैदिक फिजिक्स भविष्य में आश्चर्यजनक एवं निरापद टैक्नोलॉजी के अनुसंधान को जन्म दे सकेगी तथा चिकित्सा पद्धति में भी कुछ विशेष परिवर्तन भविष्य में हो सकते हैं।
  • विश्वभर के धर्माचार्यों व अध्यात्मवादियों को ईश्वर के अस्तित्व व स्वरूप की वैज्ञानिकता के विस्तृत ज्ञान तथा इसके द्वारा संसार में एक धर्म, एक भाषा, एक भावना को स्थापित करने में यह ग्रन्थ मील का पत्थर सिद्ध होगा।
  • वर्तमान भौतिक वैज्ञानिकों को यह जानने कि ईश्वर तत्व के ज्ञान के बिना भौतिक विज्ञान समस्याग्रस्त ही रहेगा तथा धर्माचार्यों को यह जानने हेतु कि ईश्वर के कार्य करने की प्रणाली (Mechanism) क्या है, यह ग्रन्थ एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शकका कार्य करेगा। इसके साथ ही उन्हें इस बात का भी बोध होगा कि धर्म, ईश्वर आदि आस्था व विश्वासों का विषय नहीं है बल्कि सत्य विज्ञान पर आधारित वास्तविकता है, जो सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के लिए एक समान ही है।
  • भारत के प्रबुद्ध वर्ग में नये राष्ट्रीय स्वाभिमान, ऐतिहासिक व सांस्कृतिक गौरव एवं बौद्धिक स्वतंत्रता का भाव भरने में यह ग्रन्थ एक क्रान्तिकारी दिशा देगा।
  • यह ग्रन्थ वेदों का ऐसा यथार्थ स्वरूप संसार के समक्ष प्रस्तुत करेगा, जिसकी कल्पना विश्व के सम्भवतः इस समय किसी भी वेदज्ञ को नहीं होगा।
  • यह ग्रन्थ विश्वभर के मनुष्यों को अहिंसा, सत्य, ईमानदारी, प्रेम, करुणा, न्याय आदि मानवीय सदगुणों की ओर ले जाने में समर्थ होगा तथा भय, हिंसा, आतंक, ईर्ष्या, द्वेश, वैर, मिथ्या छलकपट व बेईमानी से मुक्त करने में सहयोग करेगा।

Originally published at www.vaidicscience.com.

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