सरहदें

Originally written by Harry RJ

आज उरी हमले के बाद जो लोगो का बयान सामने आया वो काफी शर्मनाक है | लोग अपने अपने फायदे के लिए जाने क्या कुछ कह गए , मगर वो उन परिवार के आँसुओं की पीड़ा को नहीं समझ पाए जिनका एक सदस्य उस हमले में शहीद हो गया | ये कविता हर उस पिता के दर्द को बयां कर रही है जिनके बेटे सरहदों पे शहीद हो गए |


खड़ा है किसी का बेटा जंग में ,
जो तुम यहां चैन से सो रहे हो |
हज़ारों मर जाते हैं तुम्हारे खातिर ,
और तुम चंद वोटों के लिए मगरमच्छ के आंशू रो रहे हो ||

सियासत और सत्ता की जंग में ,
आशियाने तो तुम्हारे सजते हैं |
उन आशियानों को रौशन करने में ,
क्यों हमारे घर के चिराग बुझते हैं ||

जब सत्ता तुम्हारा ,ये सियासत तुम्हारा ,
तो फिर तुम्हारे शानों-शौकत के लिए क्यों मरे बेटा हमारा |
जिस दिन तुम्हारे घर का कोई जंग में लड़ेगा ,
शायद उस दिन तुम्हारे आँखों से आंसू गिरेगा ||

तुम्हारे कश्मीर-कश्मीर के झगडे में मेरे बेटे की साँसे टूट गई ,
मैं तो बाप हूँ समझ जाऊंगा मगर |
अब उस माँ को क्या समझाऊं ,
जिसकी जीती जागती कश्मीर ही लूट गई ||

वो उन पुरानी गलियों का रस्ता मोड़ आया था ,
अपने सरे रिस्ते तोड़ आया था |
ए वतन उसे सीने से लगा लेना ,
वो अपनी माँ का तड़पता सीना छोड़ आया था ||