दुनिया में पर दुनिया के नहीं : शुरूआती गाइड

मैं सोच रहा था की कैसे, मसीही होने के नाते हम स्वर्ग के नागरिक हैं, फिर भी स्वर्ग से दूर, पतित संसार में रहते हैं। हमारे जीवन में एक निरंतर तनाव है; एक बहुत ही अपवित्र दुनिया में पवित्र जीवन जीने (हमारे अन्दर पवित्र आत्मा के काम के माध्यम से) का तनाव।

इस विचार ने सवाल उठाया, हम टूटी हुई संस्कृति में लोगों के साथ बिना बिगड़े कैसे जुड़ें?

यह कैसे व्यावहारिक रूप से काम करता है? तर्क कहता है कि यदि आप कीचड़ में खेलेंगे तो आप निश्चय ही गंदे हो जायेंगे, है न? जॉन पाइपर के साथ सवाल जवाब करते वक्त मैं इस मुद्दे को लेकर सोच में पड़ गया। प्रेरितों के काम से मुझे एक अंश याद आया जहाँ प्रेरित पौलुस शहर के बीच में यूनानियों से बातें कर रहा है, जो चर्चा और बहस का स्थान था। वह एक परिचित यूनानी सिद्धांत की पहचान करके यूनानी संस्कृति को सुसमाचार का संदर्भ देता है, और फिर इसमें एक नया विचार (सुसमाचार) प्रस्तुत करता है।

हम प्रेरितों के काम १७:२२ से पढ़ते हैं…

तब पौलुस ने अरियुपगुस के बीच में खड़ा होकर कहा: “हे एथेंस के लोगो! मैं देख रहा हूँ तुम हर प्रकार से धार्मिक हो। घूमते फिरते तुम्हारी उपासना की वस्तुओं को देखते हुए मुझे एक ऐसी वेदी भी मिली जिस पर लिखा था, ‘अज्ञात परमेश्वर’ के लिये सो तुम बिना जाने ही जिस की उपासना करते हो, मैं तुम्हें उसी का वचन सुनाता हूँ। परमेश्वर, जिसने इस जगत की और इस जगत के भीतर जो कुछ है, उसकी रचना की वही धरती और आकाश का प्रभु है। वह हाथों से बनाये मन्दिरों में नहीं रहता। उसे किसी वस्तु का अभाव नहीं है सो मनुष्य के हाथों से उसकी सेवा नहीं हो सकती। वही सब को जीवन, साँसें और अन्य सभी कुछ दिया करता है। — प्रेरितों के काम १७:२२-२५

कई मायनों में yesHEis, एक ब्रांड और एक उत्पाद के रूप में, इस विचार को लेकर बना है कि हम सुसमाचार को आज की भाषा में संदर्भित कर सकते हैं, फिल्म, संगीत और अन्य कहानी कहने वाली तकनीकों के माध्यम का उपयोग कर लोगों को यीशु से परिचित करने के लिए।

प्रभावी रूप से हम संस्कृति में ‘अज्ञात ईश्वर’ को खोजते हैं, और उसे मसीह को पेश करने के लिए उपयोग करते हैं। सो, इस बात पर विचार करते हुए कि कैसे इतिहास में मूर्ति पूजा यहूदी संस्कृति में वर्जित था (पुराने नियम के कुछ हिस्सों को छोड़कर, यहूदी यीशु के समय में ज्यादा उत्साही थे), यह मुझे आकर्षित करता है कि पौलुस सुसमाचार की शुरुआत करने में इसका उपयोग करना उचित समझे। इसका यह मतलब नहीं कि मसीही होने के नाते हम बाइबिल के आदर्शों का अनादर करें, और अपने बात को सामने लाने के लिए उन चीजों का उपयोग करें जो अपवित्र या विकृत हैं।

हमें यह समझना चाहिए कि मसीह को प्रभावशाली रूप में संचार करने के लिए अपनी संस्कृति को समझना ज़रूरी है

हालांकि मेरे अनुभव में, मसीही अक्सर दूषित होने के भय से, संस्कृति से दूर रहते हैं, और मुझे लगता है कि हम उस अवसर को खो देते हैं जो परमेश्वर ने हमारे सामने रखा है कि हम अंधियारे में अपने ज्योति प्रकाशित करें। इसका मतलब है कि हमें परमेश्वर की ध्यान रखने और बचाने की क्षमता से ज्यादा शैतान की बहकाने की क्षमता में ज्यादा भरोसा है।

मैं समझाता हूँ: मान लें कि मैंने रात्रि दृष्टि वाले चश्मे पहन रखे हैं। और मैं आपका हाथ पकड़कर आपको एक अँधेरे कमरे में ले जा रहा हूँ, भले ही आप मुझे नहीं देख सकते, पर आप मेरे पीछे चल रहे हैं क्योंकि हम करीब हैं — और हम किसी भी दीवार में टक्कर नहीं खाएंगे। आपके खो जाने का एक ही तरीका है अगर आप मेरा हाथ छोड़ दें।

मुझे लगता है कि लोगों की सांसारिक संस्कृति में शामिल होने की सतर्कता (चेले बनाने के उद्देश्य से) वास्तव में परमेश्वर के साथ उनके रिश्ते की ताकत या कमजोरी को दर्शाता है।

ध्यान दें: मैं पाप में शामिल होने की बात नहीं कर रहा हूँ। मैं समाज के हर प्रभावी क्षेत्र में मसीह के चेले होने की बात कर रहा हूँ। आप धर्मनिरपेक्ष श्रोताओं के लिए एक टीवी सीरीज बना सकते हैं जो सुसमाचार की सच्चाई को दिखा सके और लोगों को यीशु के बारे में बता सके। अपने कार्यस्थल में ऐसा व्यक्ति बने जिसमें स्वीकृति और प्रेम का स्रोत हो, और अपने कार्यस्थल संस्कृति की कठोरता में अनुग्रह का आश्रय बनें।

इसका उद्देश्य सुसमाचार को पीड़ा हटानेवाली औषधि के रूप प्रस्तुत करना नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से लोगों को एक आसान तरीके से मसीह से परिचित करना है।

अगर हम संस्कृति में शामिल होने से दूर रहेंगे, तो हम उस संस्कृति के लोगों से दूर रहेंगे। और हाँ, आख़िरकार हमारा मकसद उन्हें मसीह के संस्कृति से परिचित करना है, लेकिन हमें संदेहास्पद प्रतिष्ठा वाले लोगों के साथ जुड़े रहने के डर को खत्म करना है। यीशु कभी इससे परेशान नहीं हुए, और अगर हम वास्तव में उनके चेले हैं, तो हमें भी परेशान नहीं होना चाहिए।

तो मैं आपको इस प्रश्न के साथ छोड़ना चाहता हूँ:

परमेश्वर द्वारा आपके रास्ते में रखी लोगों की संस्कृति क्या है, और उनके जीवन के ‘अनजाने ईश्वर’ क्या है जिसके माध्यम से परमेश्वर अपने आप को प्रगट करना चाहते हैं?

परमेश्वर से प्रार्थना करें कि आप उनकी संस्कृति के तरीकों को खुलकर समझ सकें, उनके हृदय को खोले ताकि वे सुनें, और सुसमाचार को आसानी से समझ सकें।

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